Thursday, September 10, 2015

तुम


ख़्वाबों के समंदर में एक टुकड़ा उम्मीदों का
जब फेंकती हूँ शिद्दत से,
कुछ बूँदें आस की छलक आती हैं 
मेरे चेहरे पर भी...
तुम.. 
उन बूंदों की ठंडक हो,
ताज़गी भरते हो रगों में हर पल,
हर रोज़ नया करते हो जीवन..
हर रोज़ मुझमे माँ नई जगाते हो।