Sunday, July 26, 2015

वक़्त..


कोसती नहीं वक़्त को,
जानती हूँ इम्तिहान लेता है।
रोती नहीं वक़्त पर,
जानती हूँ जीना सिखा देता है।
वक़्त अपनी ताक़त का अंदाज़ा,
पल भर में करा देता है।
मैं आगे निकलना चाहती हूँ,
वो मुझको हरा देता है।
लड़ती नहीं हूं वक़्त से अब..
बस बाँध लेती हूँ कलाई पर,
और यही बात कहती हूँ..
तू मेरा साथ दे, न दे
मैं चलूंगी हर पल..
तेरे ही साथ-साथ।


Sunday, July 19, 2015

यादें बरसेंगी...



घिर आये हैं बादल,
     आज यादें बरसेंगी।
तुझे देखने को आँखें,
     फिर से आज तरसेंगी।
आंसू और बूँदें आज, 
     हो जाएंगी एक जैसी।
मिल जाएंगी ख़ाक में
     काँधे को तेरे तरसेंगी।
घिर आये हैं बादल,
     आज यादें बरसेंगी..।।

Wednesday, July 8, 2015

सखी सी लगने लगी हो..

सुनो ..
तुम सखी सी लगने लगी हो।
हर पल पास बैठी रहती हो,
अपने आप में उलझाये रखती हो,
मुझे करने ही नहीं देती कुछ भी।

तुम इतने करीब क्यों आ जाती हो मेरे..
जानती भी हो..?
मैं तुम्हें पसंद नहीं करती।
कितनी झिड़कियां देती हूँ तुम्हें,
पर फिर भी..
नाराज़ नहीं होतीं तुम,
रूठकर जाती ही नहीं..
कब रुठोगी मुझसे...?
तुम उदासी हो..
पर सच..
तुम सखी सी लगने लगी हो!