Sunday, May 17, 2015

मैं..

मैं..
तेरी आँखों का 
प्यारा सा..
अदना ख़्वाब सही,

मैं..
तेरी नज़्मों का
रूठा हुआ हिस्सा कोई,
न गीत..न कहानी..
बस  किस्सा कोई,

मैं..
तेरी बिखरी हुई माला का 
एक मोती सही
मैं हूँ माथे की शिकन में..
मैं..
तेरे जेहन में भी..

मैं हूँ काजल में लिपटा 
आँख का आंसू वही
बहता था तब भी 
जब साथ थे..
बहता हूँ अब भी 
जब पास नहीं..

Tuesday, May 5, 2015

साथ..


दो जोड़ी पलकों पर टिके एक ख़्वाब जैसा है,
जैसे चमकता है जुगनू.. वैसा है
मां की एक सिमटी सी उम्मीद जैसा ..
पापा की आंखों से छलकती खुशी जैसा है,
सन्नाटे के बाद बिखरी खिलखिलाहटों जैसा
जीवन संघर्ष के बाद चैन की एक सांस जैसा है,
बाज़ुओं की ताक़त..और मन के सुकून जैसा 
त्यौहार में चखी हो मिठास..वैसा है
हिम्मत.. हौसले..और गर्व का दूसरा नाम हो जैसे  
ये 'साथ' बेटियों का ..
बुझती प्यास जैसा है।