Sunday, July 26, 2015

वक़्त..


कोसती नहीं वक़्त को,
जानती हूँ इम्तिहान लेता है।
रोती नहीं वक़्त पर,
जानती हूँ जीना सिखा देता है।
वक़्त अपनी ताक़त का अंदाज़ा,
पल भर में करा देता है।
मैं आगे निकलना चाहती हूँ,
वो मुझको हरा देता है।
लड़ती नहीं हूं वक़्त से अब..
बस बाँध लेती हूँ कलाई पर,
और यही बात कहती हूँ..
तू मेरा साथ दे, न दे
मैं चलूंगी हर पल..
तेरे ही साथ-साथ।


4 comments:

  1. ये बात भी बस वक्त ही तय करता है ... हाँ कोशिश करने वालों का साथ भी देता है ...

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  2. बेहतरीन पंक्तियाँ। वक़्त का बड़ा सुन्दर वर्णन किया है आपने।

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  3. बेहतरीन भावों से सजी लाजवाब पंक्तियाँ :)

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