Sunday, July 19, 2015

यादें बरसेंगी...



घिर आये हैं बादल,
     आज यादें बरसेंगी।
तुझे देखने को आँखें,
     फिर से आज तरसेंगी।
आंसू और बूँदें आज, 
     हो जाएंगी एक जैसी।
मिल जाएंगी ख़ाक में
     काँधे को तेरे तरसेंगी।
घिर आये हैं बादल,
     आज यादें बरसेंगी..।।

5 comments:

  1. बहुत ही कोमल भावपूर्ण रचना..

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  2. बरखा और यादों का सिलसिला पुराना है ... बहुत खूब ...

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  3. बारिश में यूँ न तरसायें..दिल ऐसे भी जलता है..इन शूल-सी बूँदों से..

    ख़ूबसूरत रचना..:)

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  4. सुन्दर और भावपूर्ण रचना। सादर ... अभिनन्दन।।

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  5. ये यादें ऐसी ही होती हैं बहुत सुन्दर रचना :)

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