Sunday, May 17, 2015

मैं..

मैं..
तेरी आँखों का 
प्यारा सा..
अदना ख़्वाब सही,

मैं..
तेरी नज़्मों का
रूठा हुआ हिस्सा कोई,
न गीत..न कहानी..
बस  किस्सा कोई,

मैं..
तेरी बिखरी हुई माला का 
एक मोती सही
मैं हूँ माथे की शिकन में..
मैं..
तेरे जेहन में भी..

मैं हूँ काजल में लिपटा 
आँख का आंसू वही
बहता था तब भी 
जब साथ थे..
बहता हूँ अब भी 
जब पास नहीं..

9 comments:

  1. कितना हसीं भी है ये मैं ... जिसके होने से ही जिंदगी भी है ...

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-05-2015) को "आशा है तो जीवन है" {चर्चा अंक - 1979} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
    ---------------

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  3. बहुत सुन्दर

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  4. sundar prastuti.
    your most welcome to my blog.
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

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  5. अति सुंदर शब्दों की माला

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  6. मैं तो कायल हो गया हूँ, आपकी रचनाओं का ।

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