Saturday, December 27, 2014

बे~वजह प्यार..


तुम कहते हो 
"तुम्हें प्यार करता हूं..
बेवजह,
प्यार करने के लिए 
क्या वजह होना ज़रूरी है?''
पर जानते हो...
एक भी वजह
जो तुम मुझे बताओगे
मैं सच कहती हूं..
मेरी आंखों में 
प्यार ही पाओगे
थोड़ी सी शरमा जाउंगी
थोड़े से गुगूर में भी रंग जाउंगी
पर सच कहती हूं
जी उठूंगी.. 
थोड़ा सा और 
खिल जाउंगी..
थोड़ा सा और 
तो बताओ न..
एक भी वजह
मुझे बेवजह प्यार करने की.. !

Sunday, December 7, 2014

तू भोर मेरी..


तू भोर मेरी
तू ही रौशनी
तू हंसी मेरी 
तू सुकून भी

तू रगों में बहते
 रक्त सा
तू सांसे मेरी..
धड़कन मेरी
सब हारी मैं
तू जीत मेरी

कितना सुखद 
जो तूने कहा
'मां'
तू सबकुछ मेरी..
सबकुछ मेरी..
                                                                                      love you son !

Thursday, December 4, 2014

मखमली शॉल..


क्यूं कहते हो..
कि मैं अपना ख़्याल नहीं रखती?
जानते हो... मेरे पास कुछ ख़ास है..
हर पल साथ रहता है 
साये की तरह..
ढाँके रखता है मुझे
धूल के थपेड़ों में..
सेकता है 
मेरे हर कंपकंपाते पल को..
ताज़ा रखता है 
तुमसे साझा किये 
हर लम्हे को..

तुम्हारे प्रेम..
परवाह 
और फ़िक्र से बुना 
वो मखमली शॉल..
सुनो...
ऊन के रेशों में 
वो तुम्हारे प्यार वाली बात कहाँ..!

Wednesday, December 3, 2014

रुकता नहीं हूं..



मेरी सफलताएं मेरी कोशिशों की कहानी 
बयां करें न करें..
मेरे हौसले कभी कम नहीं होते।
असफ़लता और सफ़लता के बीच 
जो छोटी सी रेखा है...
तमाम कोशिशों के बाद सही
धुंधला ही जाती है।

मंज़िलें मेरी भी बुलाती हैं मुझे
मैं हर पल उस ओर बढ़ता हूं
गिरता हूं..संभलता हूं..
संभलकर फिर गिर जाता हूं
पर डरता नहीं हूं..रुकता नहीं हूं..
 हारता नहीं हूं मैं ।

खुश हूं कि भीड़ का हिस्सा नहीं
सुना है कि बहुत खास हूं मैं..
मुझसे भी किसी के सपने सजते हैं
मैं रौशनी हूं किसी की आंखों की
मेरे घर में भी उम्मीदों के दिए जलते हैं।

Dec 3, International day of persons with disabilities.