Thursday, May 8, 2014

तुम..


ग़लत हो जाती हूं अकसर, 
और ग़लत होना बुरा भी तो नहीं
क्योकिं तब.. 
सही होते हो तुम !

कभी-कभी ग़लत होकर 
सच्चाई दिखती है तुम्हारी आंखों में
और तब ग़लतियां मानकर अपनी
खुश भी हो जाती हूं 
क्योंकि तब..
सही होते हो तुम!

हार-जीत के मायने ख़त्म हो जाते हैं 
जब हारकर भी खुशी मिलने लगे
कभी-कभी हारना भी अच्छा लगता है 
अगर हराने वाले होते हो तुम !

हां..हार ही तो गई हूं खुद को
और जीत लिया है तुमने मुझको
और ये हारना बुरा भी तो नहीं
क्योंकि तब..
जीत जाते हो तुम !

                                                                                               love you !!