Sunday, December 7, 2014

तू भोर मेरी..


तू भोर मेरी
तू ही रौशनी
तू हंसी मेरी 
तू सुकून भी

तू रगों में बहते
 रक्त सा
तू सांसे मेरी..
धड़कन मेरी
सब हारी मैं
तू जीत मेरी

कितना सुखद 
जो तूने कहा
'मां'
तू सबकुछ मेरी..
सबकुछ मेरी..
                                                                                      love you son !

2 comments:

  1. माँ शब्द अपने आप में कितना रस लिए है ... ये बात माँ ही समझ सकती है ...

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