Thursday, December 4, 2014

मखमली शॉल..


क्यूं कहते हो..
कि मैं अपना ख़्याल नहीं रखती?
जानते हो... मेरे पास कुछ ख़ास है..
हर पल साथ रहता है 
साये की तरह..
ढाँके रखता है मुझे
धूल के थपेड़ों में..
सेकता है 
मेरे हर कंपकंपाते पल को..
ताज़ा रखता है 
तुमसे साझा किये 
हर लम्हे को..

तुम्हारे प्रेम..
परवाह 
और फ़िक्र से बुना 
वो मखमली शॉल..
सुनो...
ऊन के रेशों में 
वो तुम्हारे प्यार वाली बात कहाँ..!

1 comment:

  1. कविता खूबसूरत तो है ही, सीधे दिल को छू जाती है।

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