Friday, October 24, 2014

मैं बाती..


मैं बाती..
और तुम दिए समान 
गहन,
तुम्हारे प्रेम में डूबी मैं 
हरती..
अपने रिश्ते का
हर अंधियारा कोना
रौशन करती मुस्कुराहटें ...

मुझको खुद में समेटे
सशक्त तुम..
ताप सहकर भी 
देते सहनशक्ति।

मिलन से हमारे
ये जो है प्रकाशित
तेज ये अलौकिक 
परिणाम हमारे तप का

निरंतर जलकर भी 
तपती नहीं..
अग्नि होकर भी
जलती नहीं..
प्रकाशित रहूंगी सर्वदा
जो सींचता रहेगा जीवन
प्रेम घृत तुम्हारा।।

Happy Diwali hubby!

14 comments:

  1. खूबसूरत अभिव्यक्ति :)

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    1. शुक्रिया आपका नीता जी

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  2. बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति ..... उम्दा रचना ....

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    1. दी। आपका आशीर्वाद है। धन्यवाद

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  3. शुभकामनायें , स्नेह, साथ बना रहे

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    1. मोनिका जी, शुक्रिया आपका

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  4. अत्यंत सुन्दर.... बधाई आप को इस भावपूर्ण रचना के लिये

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  5. सुंदर अभिव्यक्ति..

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  6. तुम्ही से सब कुछ है मेरा ... ये प्रकाश भी ....
    सुन्दर भावाव्यक्ति ... दीपावली की शुभकामनायें ...

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    1. आपको भी दीपावली की शुभकामनाएं..

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  7. स्नेह से परिपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति .... शुभकामनाएं

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  8. बहुत ही प्रभावशाली रचना।.

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