Tuesday, October 14, 2014

'मां'


तेरी शैतानियों पर
कभी गुस्सा..
तो कभी प्यार आता है,
संग तेरे..
मेरा बचपन भी 
मुस्कुराता है,
भीग जाती हूँ मैं..
अन्दर तलक..
जब गले लगकर 
तू मुझको 
'माँ' बुलाता है!

8 comments:

  1. अले अले ये तो मेली बात है
    स्नेहाशीष और असीम शुभकामनायें परी और नाती को

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीय माँ के लिए ... माँ पर लिखी हर रचना मुझे बहुत अछि लगती है क्यूंकि माँ के जैसा इस दुनिया में कोई दूसरा नहीं ...

    ReplyDelete
  3. दिल को छूते हुए शब्द ...

    ReplyDelete
  4. सुन्दर भावों से भरी रचना
    आभार!

    ReplyDelete
  5. आपकी ये रचना चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.in/ पर चर्चा हेतू 18 अक्टूबर को प्रस्तुत की जाएगी। आप भी आइए।
    स्वयं शून्य

    ReplyDelete

आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।