Friday, October 3, 2014

रावण...

कोशिशें जारी हैं
उसपर विजय पाने की,
लडते आ रहे हैं उससे..
जिद है उसे हराने की,
पर और विशाल हो जाता है वो
हर वार के बाद
सवाल हर बरस मन में कहीं रह जाता है..
मन का रावण क्यों कभी
 जल नहीं पाता है..?

                                                           Photo courtesy: Times of India

12 comments:

  1. मन का रावण मर जाए तो हर कोई राम हो जाए
    लेकिन तब राम हैं कैसे सम्भव होगा समझना

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    1. बिलकुल सही कहा दी।

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  2. Beautiful lines Parul. We remember Ram because of Ravan. Just think if there would not be any Ravan, do we remember Ram?

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (04-10-2014) को "अधम रावण जलाया जायेगा" (चर्चा मंच-१७५६) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    विजयादशमी (दशहरा) की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति पारुल जी। सही कहा आपने कि मन का रावण अजेय हो गया है। स्वयं शून्य

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  5. राम और रावण की लड़ाई सतत जारी है जहाँ विश्राम लिया रावण जीवित हो जाता है. सदैव जागरूक रहना है.

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  6. सही कहा. ऐसा ही होता है.

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  7. आत्म चिंतन और आत्म साहस जरूरी है ... जो नहीं आ पाटा ...
    अर्थपूर्ण रचना ...

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