Saturday, September 13, 2014

मेरे चेहरे पे मत जाना..


देखो..मेरे चेहरे पे मत जाना

कभी-कभी रंगकर्मी की तरह
बदल लेती हूँ भाव अपने चेहरे के
सीख रही हूँ न..
जीवन जीने की कला
दुनिया भी तो ऐसी ही है न
शक्ल देखकर..मन पढ़ लेती है

पर मैं..
अब बदल लेती हूँ
अपने माथे की सिलवटों को 
मिला देती हूँ उन्हें उन लकीरों में
जो हंसते हुए चेहरे पर उभर आती हैं

सारी व्याकुलताओं को
आँखों के काजल में छुपाकर
बना लेती हूँ रात सी...
भोर का इंतज़ार करती

मैंने आंसुओं को भी समझाना सीख लिया है
कह दिया है.. थोड़ा शरमाया करो..
आवारा बन सबके सामने न आया करो
वो भी अब मानकर मेरी बात
 छिपे रहते हैं मुखौटे की ओ़ट में

तो सुना न..
मेरे चेहरे पे मत जाना

18 comments:

  1. गज़ब की लेखनी .... सच्चाई की रंगोली
    स्नेहाशीष सारे रंग खिले खिले रहे हमेशा

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया विभा दी

      Delete
  2. Replies
    1. रश्मि प्रभा जी .. आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

      Delete
  3. क़त्ल...:-) बेहद ख़ूबसूरत लिखा है, महोदया.. ;-)

    यूँ ही लिखते रहिये..और साझा करना परम आवश्यक है..:-)

    ReplyDelete
    Replies
    1. इरादा तो ऐसा नहीं है प्रिय..यांका जी :)

      Delete
  4. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 15/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

    ReplyDelete
    Replies
    1. इतना मान देने के लिए आभारी हूं श्रीमान कुलदीप जी

      Delete
  5. http://bulletinofblog.blogspot.in/2014/09/blog-post_14.html

    ReplyDelete
  6. ज़िन्दगी का कड़वा सच... मुखौटा पहन कर जीने की विवशता... चिंतन को बाध्य करता छन्दमुक्त व्यंग्य.. !

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thankyou so much ma'm for visiting my blog

      Delete
  7. पर मैं...
    अब बदल लेती हूँ
    अपने माथे की सिलवटों को
    मिला देती हूँ उन्हें उन लकीरों में
    जो हंसते हुए चहरे पर उभर आती हैं

    वाह ...
    आज की सबसे बेहतरीन कोई कविता पढ़ी है तो वो यही है
    लिखावट की कशमकश कमाल है ...बेहद प्यारी लेखनी.



    मेरे ब्लॉग तक भी आईये,अति प्रसन्नता होगी मुझे रंगरूट

    ब्लॉग अच्छा लगे तो ज्वाइन भी करें

    ReplyDelete
  8. वाह..बेहतरीन काव्य-सृजन !

    ReplyDelete
  9. kya baat.....kya baat....kya baat....parul jee...


    meri nayee post pe aapka swaagat hai..

    http://raaz-o-niyaaz.blogspot.com/2014/09/blog-post.html

    ReplyDelete
  10. प्रेम कि मार्मिक अभिव्यक्ति के साथ ...सुंदर रचना.... आपकी लेखनी कि यही ख़ास बात है कि आप कि रचना बाँध लेती है.....

    आभार....

    ReplyDelete
  11. अच्छी भावपूर्ण रचना !
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    राज चौहान
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

    ReplyDelete
  12. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार, आज 22 अक्तूबर 2015 को में शामिल किया गया है।
    http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमत्रित है ......धन्यवाद !

    ReplyDelete
  13. बहुत खुब...!
    लाजवाब .......!
    सोचने पर मजबूर करती ये रचनाएँ ।

    ReplyDelete

आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।