Tuesday, June 24, 2014

आत्महत्या..हल नहीं


"कभी कभी कुछ सत्य विचलित कर देते हैं मन
वो मेरे इतनी करीब भी नहीं थी..
फिर क्यों मन उसका लिखा पढ़कर विचलित हो उठा
उसके दर्द को महसूस भी करना चाहा,
पर उसकी पीड़ा की अनुभूति 
मुझे किस तरह होती.. 
न जाने क्या झेला होगा उसने और 
आगे क्या झेल पाना उसके लिए संभव नहीं था
की जिसके आगे उसे 
अपना जीवन त्याग देना बेहतर लगा।
वो जीवन जिसे सँवारने के लिए 
कितनी मेहनत की होगी उसने,
अपने ख्वाब पूरे करने के लिए 
कितनी ही बार समाज से लड़ा होगा,
मेहनत से खुद की पहचान बनाई होगी।
शायद उसे ये पता ही नहीं है
की उसके जैसे लोग कितने कम हैं इस दुनिया में,
कितने सारे लोगों को बिना मिले भी प्रेरणा देती है वो,
कितनी ही लड़कियों की आँखों में 
एक ख्वाब जगाती है वो..
पर क्या खुद को जानती है वो?
नहीं....
जो जान पाती तो 
जान देने की कोशिश न करती।
पर खुश हूँ... कि वो है..
अब खुद को जानने के लिए।
और ये मानने के लिए की 
जान किसी की भी हो 
..बहुत कीमती होती है।"


(मेरी ये दोस्त भारत के एक जानेमाने न्यूज़ चैनल की प्रतिष्ठित एंकर है जो मानसिक उत्पीडन की शिकार हुई )

5 comments:

  1. Mindblowing Parul Jee
    बहुत खूब

    ReplyDelete
  2. पारुल जी आप निशब्द कर देती हैं कई बार

    ReplyDelete
  3. सच है की आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं है ... इस मानसिक अवस्था से बाहर आना ही सच्चा प्रयास है ...

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सटीक और सार्थक रचना

    ReplyDelete

आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।