Monday, June 16, 2014

सपने मरा नहीं करते !


सपने मरा नहीं करते..जिंदा रहते हैं
आँखों में जो खारा सा सागर है न..
उसकी तली पर पड़ी सीपियों में बंद रहते हैं
मोती की तरह
परत दर परत बढता इंतज़ार 
बना देता है उन्हें अनमोल...सदा के लिए।
सपने मरा नहीं करते...जिन्दा रहते हैं
माथे की सिलवटों में छुपे रहते हैं..
डरते हैं कभी कभी.. कि साकार हो गए तो...
कितने ही दिल टूट जायेंगे
कितने ही अपने रूठ जायेंगे
और कितने ही ख्वाब फिर बंद हो जायेंगे
उन्हीं सीपियों में..
निःशब्द से...
गुमनाम से..
सच..सपने मरा नहीं करते !

9 comments:

  1. सपने मरा नहीं करते...जिन्दा रहते हैं
    ....वाह बहुत लाज़वाब कथन
    सत्य कथन। बेहतरीन अभिव्यक्ति

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  2. क्या खूबसूरत एहसास हैं रचना में। मन खुश हो गया

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  3. सपने मरा नहीं करते बहुत सही और सुन्दर अहसास ....

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  4. सपने मरने भी नहीं चाहियें .. पर कुछ सपने पूरे हो जाने चाहियें ... चाहे कुछ घुट घुट के मर जाएँ ...
    सपने सपने होते हैं ....

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  5. कितने ही दिल टूट जायेंगे
    कितने ही अपने रूठ जायेंगे
    यही सोचते सोचते ख़ुद को मिटा लेते हैं
    बहुत अच्छी लगी कविता
    सार्थक लेखन
    God Bless You

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  6. सच में सपने मरते नहीं
    सपने मर जाते तो हम हम नहीं होते
    अनुसन्धान, आविष्कार नहीं होते

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  7. सुंदर रचना. बिन सपनों का जीवन क्या?

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  8. जबरदस्त...बहुत खूब..

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  9. बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजी और सुखद एहसास कराती सार्थक रचना ! सच कहा आपने सपने मरा नहीं करते

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