Saturday, June 7, 2014

मुश्किल पल..


वो पल बहुत मुश्किल था
दूर जा रहा था वो आहिस्ता-आहिस्ता !
अपने साथ मेरा एक हिस्सा लिए
और छूट रहा था 
एक जिस्म..पीछे कहीं
लबों पर झूठी मुस्कान लिये
सच..वो पल बहुत मुश्किल था
दूर जा रहा था वो आहिस्ता-आहिस्ता !

8 comments:

  1. बहुत दिनों बाद ब्लॉग पढ़ने बैठा हूं। कदम रखते ही पहले आपकी रचनाओं को खोजा और पहली ही रचना दिल को छू गई...बहुत अच्छी कविता है।

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  2. संजय पुत्र से मैं भी सहमत हूँ ...... उम्दा रचना
    लव हो गया परी
    God ब्लेस्स you

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  4. महसूस कर रहा हूँ पंक्तियों को.

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  5. Door jata hua pal chod jayga kuch yaaden ... Jo rahengi saath barson tak ...
    Gahra ehsas liye shabd ...

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  6. एहसासों को सहला गई आपकी रचना

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।