Tuesday, April 22, 2014

वो बातें..


वो छिपी हुई हैं मन में कहीं,  वो जिन्हें कभी भी सुना नहीं
वो जो बिखरी हुई थीं यहाँ वहां, जिन्हें तुमने ह्रदय में दबा लिया।

वो चाशनी से पगी हुईं, कानों में रस घोलती
वो जिनको सुनकर ख़ुशी मेरी, आंसुओं में बरबस डोलती
वो बातें शब्दविहीन सी, आत्ममंथन करती हुई
वो बातें समुद्र की लहरों सी
जिन्हें तुमने ह्रदय में दबा लिया।।

वो बातें छोटी मोटी सी, वो बातें कच्ची-पक्की सी
वो बातें हंसाती तोतली, वो बातें फूल बिखेरती 
वो बातें शरारतों में ढली हुई, वो बातें बालपन में रमी हुई
वो बातें तुम्हारे बचपन की
जिन्हें तुमने ह्रदय में दबा लिया।।

कही अनकही के बीच का, ये जो वक़्त है पहाड़ सा
शुन्य से शुरू हुआ, ये सफ़र है अपार सा
वो बातें पथ के कांटों सी
जिन्हें तुमने ह्रदय में दबा लिया।।

वो बातें इंतज़ार में लिपटी हुई, मेरे धैर्य का इम्तिहान हैं
मुझ में जीवन घोलती, मेरी खुशियों का सामान हैं
वो बातें तेरी मेरी सी, जिन्हें तुमने कभी भी कहा नहीं
वो बातें मेरा जीवन हैं
जिन्हें तुमने ह्रदय में दबा लिया।।

                                                               You are not alone..I am with you.. hamesha
                                                                   love you Beta !!

12 comments:

  1. माँ के वात्सल्य के सदृश कुछ भी नहीं.

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  2. गहरी संवेदना एवं सुंदर रचना.

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  3. आँखों के द्वारा आँखों में ... मौन कि जुबानी सुनी बातों के एहसास शब्दों में उतर आये हैं ...
    भावपूर्ण ...

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  4. माँ की कमी का अहसास उसके न रहने पर ही होता है।

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  5. सुन्दर वात्सल्य से ओत -प्रोत....

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  6. sahi kaha aapne.....Sometimes words are not enough for some feelings....I also tried but couldnt...
    Only I can say is U r the only one who can give him all the happiness of the world and can feel him that he is the best :)
    love u!!!

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  7. सुन्दर सी कविता !!

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  8. माँ क्या प्यार और दुलार .......... अजूबा अनोखा और अनकहा !! सुंदरतम !!

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