Saturday, April 5, 2014

अहसास.. तेरे संग होने का


तपती धूप में बारिश की बूंद जैसा
भरी थकान में चाय के गर्म घूंट जैसा
पंखुडियों पर टिकी ओस की बूंद हो जैसे.. 
मंदिर में जलते दिये की लौ जैसा
कभी लगता है माथे पर सजी बिंदिया जैसा
कजरारी आंखों में तैरते हुए ख़्वाब की तरह
और कभी लौंग के लशकारे की तरह झिलमिलाता सा..
खूबसूरत है..
 धड़कनों को शिथिल सा कर जाता है
सुख और सुकून के मिलन से जन्मा 
एक अहसास..
तेरे संग होने का

सच.. बहुत सुखद है 
तेरा होना..
मेरे संग होना..!


photo courtesy: 'Nishant Kashyap Photography'

10 comments:

  1. बहुत खूब....सुन्दर पंक्तिया!!!

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  2. लौंग के लशकारे की तरह झिलमिलाता सा खूबसूरत है तुम्हारी रचना परी
    हार्दिक शुभकामनायें

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  3. कुछ सिखाती समझाती कविता...... बहुत सुंदर भाव

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  4. भावपूर्ण उद्द्गार..... सुन्दर पंक्तियाँ

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  5. sach me bahut sundar rachna ....

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  6. अंधकार में उजाले की किरण है प्यार

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  7. किसी के साथ होने का एहसास ही कितना कुछ कर जाता है ... फिर उनका साथ हो जाए तो कायनात महक उठे ...

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