Monday, March 10, 2014

महिला दिवस !


मेरी कामवाली जब आज सुबह नहीं आई तो गुस्से की जगह चेहरे पर मुस्कुराहट आई। आज महिला दिवस है और उसे भी पूरा ह़क है इस दिन को अपने तरीक़े से मनाने का। कुछ 2 घंटे बाद दरवाजे पर दस्तक हुई.. देखा तो कामवाली थी। मैंने पूछा "आज क्या हुआ तुझे.. इतनी देर से कैसे आई।" वो बोली "दीदी आज मेरी बेटी के स्कूल में महिला दिवस समारोह था वहां मुझे भी बुलाया गया था। आपसे कहना भूल गई थी।" मैंने पूछा "तो कैसे मनाया तुमने महिला दिवस?'' वो बोली ''अरे दीदी मेरे लिए तो सारे दिवस एक ही जैसे हैं। मैं बस एक बात जानती हूं कि मुझे मेरी बेटियों को पढ़ाना है और उसके लिए मुझे जितनी भी मेहनत करनी पड़े..मैं करूंगी, उनकी पढ़ाई कभी रुकने नहीं दूंगी।" मन ही मन मुझे गर्व हुआ उसपर..और एक महिला होने पर। सोचा कि.. देर से ही सही पर जागरुक हो रही हैं महिलाएं..आने वाला समय निश्चित ही महिलाओं के लिए बेहतर होगा। इससे अच्छा महिला दिवस मेरे लिए कोई न था।

9 comments:

  1. Sahi baat hai..shiksha k saath exposure bhi zaruri hai..tbhi society mein kuch positive changes ki umeed kar sakte hain

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  2. .......प्रेरित करती अभिव्‍यक्ति बहुत ही अच्‍छी लगी

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  3. सार्थक अभिव्यक्ति ....

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  4. आपकी इस प्रस्तुति को आज कि फटफटिया बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  5. सशक्त अभिव्यक्ति |
    आशा

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  6. हालात के मद्देनज़र बेहतरीन संक्षिप्त लेख

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  7. नारी में ऐसी जागृति ही नारी के उत्थान में सहयोगी होने वाली है ...
    अच्छा लिखा ही बहुत ही ...
    होली कि हार्दिक बधाई ...

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  8. बहुत खूब !!
    मंगलकामनाएं होली की !!

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  9. सुन्दर और सामयिक पोस्ट...
    आप को होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@हास्यकविता/ जोरू का गुलाम

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।