Monday, March 3, 2014

वो कुछ साल..

~ लघु कथा लिखने का ये पहला प्रयास था। 'नया लेखन - नए दस्तखत ' ने चित्रकथा प्रतियोगित का आयोजन किया , जिसमें मेरी लघुकथा को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया ~

                  ऋचा कॉलेज क्या पहुंची.. उसके तो पंख ही लग गए। आज़ाद खयालों की ऋचा अपने मन का करती.. नये-नये दोस्त बनाती। कॉलेज ख़त्म होते होते ऋचा का लाइफ़स्टाइल बदल चुका था। नए जीवन के सपने लिए ऋचा सातवें आसमान पर थी.. एक दिन पिता ने उसे बुलाकर कहा ‘अब तुम बड़ी हो गई हो, और मैं रिटायर.. अब परिवार का ध्यान तुम्हें ही रखना है।‘ ऋचा ज़मीन पर आ गई थी। जल्दी ही उसे नौकरी भी मिल गई थी.. लेकिन खर्च पूरा नहीं पड़ता था.. उसने ट्यूशन पढ़ाना भी शुरू कर दिया था। उसे पता ही नहीं चला कि ये 5 साल कैसे बीत गए। लोग कहते पिता उसकी कमाई पर ऐश कर रहे हैं.. शुरू में तो उसे बुरा लगता लेकिन अब उसे भी ऐसा ही लगने लगा था।
                 पिता ने अपने दोस्त के बेटे वरूण से ऋचा की शादी तय कर दी थी.. एक बारगी उसने सोचा कि अब घर का खर्च कैसे चलेगा.. पर वरूण ने कहा कि शादी तो कर लो बाकी बाद में देखेंगे। आज उसकी शादी थी.. पिता सालों बाद उसके कमरे में आए थे। उनकी आंखों में आंसू थे और हाथों में एक लिफ़ाफ़ा। पिता ने लिफ़ाफ़ा ऋचा की ओर बढ़ाया, जिसमें एक चेक था..ऋचा के नाम का.. उसकी सालों की कमाई की पाई-पाई का चेक.. पिता रूंधे हुए गले से बोले.. तेरे कुछ साल लौटा रहा हूं.. मैंने देखा कॉलेज के बाद तेरी संगत बदली.. तेरे कदम बहकने लगे थे.. तू मेरा गुरूर थी.. तूझे बिगड़ते हुए कैसे देखता.. इसलिए ज़िम्मेदारियां लाद दीं.. अब मुझे कोई डर नहीं.. ज़िम्मेदारियां मैने वापस ले ली हैं.. तेरे साल तुझे लौटा रहा हूं..। ऋचा की आंखो से अविरल आंसू बहने लगे।

8 comments:

  1. सार्थक कहानी ! बहुत अच्छी लगी !

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  2. पारुल जी ,अच्छा लिखती हैं आप ……… साधुवाद ,
    डॉ नीरज यादव
    http://achhibatein.blogspot.in

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  3. बहुत अच्छी सार्थक कहानी.......

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  4. सार्थक कहानी ... बड़े हमेशा बच्चों की भलाई ही सोचते हैं ...

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  5. bhavpurn kahani likhne aur puraskar pane hetu mubarakbad:))

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  6. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन ट्रेन छूटे तो २ घंटे मे ले लो रिफंद, देर हुई तो मिलेगा बाबा जी का ठुल्लू मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  7. सुन्दर शब्द संयोजन / सुन्दर अभिव्यक्ति

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।