Monday, February 10, 2014

हम~तुम..साथ में


कभी गली के मोड़ से 
घर के टैरेस को ताकते
कभी तुझको खोजते
कभी खिड़की से झांकते 
आंखें पढ़ते हम~तुम..
साथ में

जागती रातें..
धड़कनें बढ़ाती 
वो अनछुई बातें    
शरमाते, घबराते फोन पर 
बतियाते हम~तुम..
साथ में

भीगी भीगी सी रात में
चांद के साथ में
हाथों में हाथ थे
बहके जज़्बातों में 
खोये थे हम~तुम..
साथ में

समंदर के किनारे
सीली सी रेत पर बैठे
सपनों का घर बनाते
कल को सजाते हम~तुम.. 
साथ में 

मुशकिल डगर है 
लम्बा सफर है 
पथरीले रस्ते
मगर हंसते हंसते 
पाएंगे मंज़िल हम~तुम..
साथ में

                                                               चित्र -गूगल से साभार

14 comments:

  1. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति.....!!

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  2. बस हम तुम
    और मैं -परी
    हार्दिक शुभकामनायें
    मान की सारी मुरादें पूरी हो

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  3. सुंदर अभिव्यक्ति .......

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  4. साथ हो तो हर राह आसान हो जाती है ... फिर प्रेम की ऊष्मा भी तो सोने पे सुहागा ...

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  5. बहुत सुन्दर रचना....
    मनभावन
    :-)

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  6. आपकी प्रविष्टि् कल रविवार (16-02-2014) को "वही वो हैं वही हम हैं...रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1525" पर भी रहेगी...!!!
    - धन्यवाद

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  7. wah sundar panktiyan.....bhagwan kare apki sari manokamnayein puri ho

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  8. sundar bhav sundar prastuti parul :-)

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  9. साथ हो तो क्या बात हो, सुंदर रचना .

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