Thursday, January 23, 2014

उलझन सुलझा दो न..


कहा था तुमने मुझसे कभी
''तुम बिन जी न पाएंगे
तुम ही जीवन हो  
तुम बिन हम..
बस मर जाएंगे"
आज उलझन में हूं
 तुम ही सुलझा दो ना.. 
हर बात पर चुप हो जाने वाले, 
मेरे एक सवाल का जवाब दो ना..
क्यों नमी मेरी आंखों से गुम नहीं होती  
मुझको अपनी ज़िन्दगी कहने वाले
     क्यों आज तुझे ज़िन्दगी महसूस नहीं होती..?

22 comments:

  1. संवेदनशील भाव लिए दिल को छू लेनेवाली रचना..
    http://mauryareena.blogspot.in/

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  2. प्रेम के स्वरुप को कितनी सहजता से व्यक्त किया है-----
    बहुत सुंदर
    बधाई -----

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  3. सुन्दर भाव.......

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (25-1-2014) "क़दमों के निशां" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1503 पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  5. कल 25/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  6. कई सवाल से उलझते गुजर जाती है ज़िंदगी
    कई अनसुलझे रह भी जाते हैं
    अभिव्यक्ति खूबसूरत है
    हार्दिक शुभकामनायें

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  7. bahut sundar bhav liye huye ...:)

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  8. सुन्दर रचना। बधाई।।।

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  9. जीवन के कुछ अनुत्तरित प्रश्नों का सुन्दर अभिव्यक्ति !
    नई पोस्ट मेरी प्रियतमा आ !
    नई पोस्ट मौसम (शीत काल )

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  10. शुभ प्रभात
    अप्रतिम....
    सादर

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  11. बहुत बढ़िया पारुल जी....
    बेहद कोमल एहसासों को उकेरा है !!

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  12. क्यूँ कुछ प्रश्नों के उत्तर नही मिलते । सुंदर भावाभिव्यक्ति।

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  13. उलझती जिंदगी के लिए सुलझते शब्द :)
    भावों से भरी हुई रचना... :)

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  14. सुन्दर भावाभिव्यक्ति... पुरानी यादें कुछ ज्यादा ही कसकती हैं. कई सवालों के जवाब नहीं मिलते मगर उनमे कितने दर्द छुपे हुये रहते. आपके ब्लॉग पर पहली बार आया हूँ, आता रहूँगा.
    http://himkarshyam.blogspot.in

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  15. भाव पूर्ण ... खामोश हैं मगर बात से हते हो नहीं हैं ... ये दौर है जो चला जायगा ...

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।