Tuesday, January 7, 2014

पूस की एक रात..


पूस की एक रात..
चांद को निहारते
महसूस की  
धीमी सी हलचल..
बादलों ने रंग बदला
काली घटाओं ने चांदनी को घेरा
रौशन जहां धुंधला गया
शांत से माहौल में यकायक
मेघगर्जना हुई
एक बूंद गालों पर पड़ी
एक बूंद आंखों से गिरी
और फिर तेरी यादों की   
झड़ी सी लग गई
तेरी यादें थीं सीली-सीली सी
भीगी देह और 
भीग गया अंतर्मन भी
तेरे न होकर भी 
तेरे होने को महसूस किया
उसी पल तेरा हाथ थाम के  
एक बार फिर
तनहा ही गुज़ार दी
पूस की एक रात..

29 comments:

  1. बहुत सुन्दर ......

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    1. धन्यवाद कौशल जी

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  2. one of the nest from you


    pls do come at my new post at

    http://raaz-o-niyaaz.blogspot.com/2014/01/blog-post.html

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  3. कल 09/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  4. सुन्दर भाव प्रस्तुति !
    नई पोस्ट सर्दी का मौसम!
    नई पोस्ट लघु कथा

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  5. जब उनका साथ है यादों में तो तन्हाई कैसी ...
    भावपूर्ण प्रस्तुति ...

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    1. ये साथ होकर भी तनहाई का आलम था...

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  6. wah ! bahut bahut sundar.....laga bass padhti hi rahun

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    1. सच... शुक्रिया रेवा जी

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (11-1-2014) "ठीक नहीं" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1489" पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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    1. मेरी रचना को भी अपना मंच देने के लिए आपका आभार राजीव जी...

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (11-1-2014) "ठीक नहीं" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1489" पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  9. न होते हम तन्हां अगर जहाँ में ये मोहब्बत न होती .............
    LOve U Sis Angal
    God Bless U

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  10. बहुत सुन्दर मनभावन ...

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  11. महसूस हो रहा है।अति सुंदर चित्रण

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  12. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ कड़ियाँ (3 से 9 जनवरी, 2014) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,,सादर …. आभार।।

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

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  13. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ कड़ियाँ (3 से 9 जनवरी, 2014) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,,सादर …. आभार।।

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

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  14. बहुत खूबसूरत

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  15. एक बूंद गालों पर पड़ी
    एक बूंद आँखों से गिरी
    और फिर तेरी यादों की
    झड़ी से लग गयी ..
    ....प्यार की कसक यूँ ही झरती है..बहती हैं ..
    बहुत सुन्दर ....

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  16. बहुत बढ़िया सुंदर एहसास को वयां करती
    सुंदर रचना !!

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  17. आदरणीया पारुल जी ,
    मुझे जानकर दुःख हुआ की आपको अपनी रचना में थोडा सा फेर बदल कर जैसा आपने कहा लिखी गई मेरी रचना चुराई हुई लगी | अगर ऐसा है तो पूरा उसको बदल सकती हूँ उसमें मुझे कोई आपति नहीं ,मैंने मुंशी प्रेम चंद जी की लिखी कहानी से प्रेरित हो ऐसा कुछ लिखने का सोचा तो आपकी रचना पर भी मेरी नज़र गई और कुछ पंक्तियाँ आपने वाकई ऐसी ही लिखी थी जो मैं लिखना चाहती थी तो उसको मैंने नहीं बदला ,मेरी साडी गजल जो अभी अभी मैंने विरह पर लिखी हैं आप देख सकते हैं ,आपको बुरा लगा उसके लिए मुझे अफ़सोस है | मैं फिलहाल इसको हटा देती हूँ आपके लिए ,उसको पूरा अपने रंग में ही लिखती हूँ | २०० से ऊपर पोस्ट लगा चुकी हूँ अगर ऐसे ही लिखनी होती तो बहुत लिख लेती | मेरे दूसरे दो ब्लॉग भी आप देख सकती हैं | बस अभी अभी हुई अप्रिय घटना के कारण कुछ अपनत्व सा मिला इन शब्दों में तो दो चार पंक्तियाँ ऐसे की ऐसे ही लगा दी |

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  18. पारुल, सुन्दर रचना की है । हर पंक्तियाँ स्वयं बोलती हैं ।

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।