Wednesday, July 24, 2013

बदलाव..



कभी अच्छे,  तो कभी बुरे होते हैं
बदलाव.. जीवन का सत्य होते हैं
खुशियां देकर आंखों की चमक बढ़ाते 
कभी दर्द देकर उन्हीं आंखों को रुला देते हैं
अपने मन माफ़िक उलट लेने की इजाज़त नहीं देते
ये बहुतों को यूं भी परेशां किया करते हैं
बदलाव.. जीवन का सत्य होते हैं
वक़्त के हाथों में है इनकी डोर.. और ये
पूरी दुनिया को बदलने की ताकत रखते हैं
मन को समझाकर अपना लेना अच्छा
बदलाव.. उम्मीद की किरण होते हैं
बदलाव.. ज़रूरी होते हैं।

Saturday, July 20, 2013

देख रही हूं..



तेरी मासूम सी हस्ती है... 
और मेरी अथाह उम्मीदें
तुझे ठोकरों से संभलते देख रही हूं

अपने ही डर से लड़ते तुम, 
तुम्हें निर्भय बनते देख रही हूं..

अपनी अक्षमताओं को हराते तुम,
तुम्हें योग्यताओं में ढ़लते देख रही हूं..

तेरे उत्साह तेरे जीव से विशाल,
नाकामियों को पिघलते देख रही हूं..

फक़्र है तुमपर.. तुम्हारी कोशिशों पर,
अंधेरी धुंध छंटते देख रही हूं...     

मेरी आंखों से जन्मे हज़ारों सपने,
तेरी आंखों में पलते देख रही हूं...

मेरी कोशिशों को साकार करते तुम, 
मैं खुद को मां बनते देख रही हूं..

                                              I am so proud of you son !

Tuesday, July 9, 2013

तेरे रंग..



तेरे ही रंग, रंग रंग गए
रग रग मेरे.. अंग अंग मेरे,
रग रग में रंग...रंग रंग में तुम
तुम तुम में मैं, मुझ मुझ में तुम
मुझ में घुले.. हर रंग तेरे ...
ओस से धुले..खुशबू मिले..
भीगता मन..तेरे प्यार में हरदम 
तुझसे ही महकती.. 
तुझमें ही रंगी.. मैं..!

Monday, July 8, 2013

अभी और भी जीना है..

                                 
कभी थकान दामन थामती है.. और उदासियों की गर्त में मन गिरने जाता है ..मैं खुद को थाम लेती हूं। ये कविता पढ़ती हूं और गहरी सांस भरकर फिर से जुट जाती हूं....

                                     

उगते सूरज ने आज मुझसे कहा
चलो, कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी चलना है
अभी और भी जीना है

ये बाल अब पकने लगे, 
माथे के बल भी बढ़ने लगे
आंखों की चमक खो रही 
होंठों की हंसी को बनाए रखना है 
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

मुश्किलों का क्या है, 
आएंगी जाएंगी
अभी और लड़ना है
अभी और जीतना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

जीवन के हर मोड़ पर 
तुम्हें पत्थर कई मिलेंगे
उनको संजोना है और
नाम अपना लिखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

ड़ालियों के फूल मुरझा न जाएं
उन्हें बागीचे में सजाए रखना हैं
हर सुबह सींचना है 
हर रात देखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

आंधियां तो आएंगी और सताएंगी
हवा ही तो हैं...हवा हो जाएंगी
बस चरागों की लौ को थामे रखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है


Wednesday, July 3, 2013

मेरा घर..


मैंने बहुत से मकान बदले हैं..
कुछ छोटे तो कुछ बड़े ..कीमती पत्थरों से जड़े 
चमचमाते फर्श और बड़े से बागीचे वाले भी
कुछ ऐसे भी थे जिनमें हवा आने की जगह न थी
और कुछ जिनमें सामान सजाने की जगह कम थी
कई ऐसे थे जो शुरू होकर ख़त्म ही हो जाते
और कई ऐसे भी कि रसोई तक जाने में पैर अलसाते 
कहीं बालकनी में चाय पीने का लुत्फ़ लिया
तो कहीं नंगे पांव ज़मीन पर चलने को तरस गये

महीने की पहली तारीख ने हर बार ये याद दिलाया
कि ये मेरा घर नहीं.. इसमें रहने का लगता है किराया
जानती थी कि एक घर का सपना जितना मेरा है उतना तुम्हारा भी था..
फिर भी नाराज़ होकर कई बार तुम्हारा दिल दुखाया..
तुमने मेरी कड़वी बातों को सुना नहीं 
और जो नहीं कहा उसे सहेज लिया..

सुकून तो हर जगह मेरे पास था
तुम्हारा और प्यारे से बेटे का जो साथ था
पर जो कमी थी वो तुमने आज पूरी कर दी
जिसे करने के लिए एक उम्र बीत जाती है
मेहनत इतनी कि चेहरे पे नज़र आती है
शायद ही कोई किसी को तोहफ़े में देता होगा
जो तुमने आज मुझको दे दिया
मेरा घर.. मेरा आंगन ..मेरा संसार
जिसका किराया अब मुझे नहीं देना होगा..

                                                         Thanks to you love !