Wednesday, December 25, 2013

हम फिर साथ होंगे..


कई बार आवाज़ दी होगी मुझको,
मैं फिर भी न आई होंगी,
उसी वक़्त वो बह आये होंगे,
जिन्हें कितना सहेज कर रखते हो तुम..

वो जिनको हथेलियों में छुपाने का मन करता है,
उसकी नमी से दिल अपना भिगोने का मन करता है,
वो आ जायें तो आंखें सुर्ख हो जाती हैं तुम्हारी..

तनहाइयों में कई बार छुपा लिए होंगे,
मुझे याद करके न जाने कितने खो दिये होंगे,
वो जो स़बसे अज़ीज़ हैं मुझको,
     जिन्हें देखकर मेरी बेचैनियां बढ़ जाती हैं..

तुमने भी जिन्हें बार-बार संभाला होगा,
रोकना चाहा होगा बहुत, फिर भी वो बह आये होंगे,
कितने तनहा थे तुम, इस बात की गवाहीं देंगे,
घर के तकियों पर भी वो दिखाई देंगे..

हां बहुत अज़ीज़ हैं मुझको...जो तुमसे बिखर गये हैं
ये अनमोल मोती...तेरी मेरी यादों के 
हम मिलकर समेट लेंगे 
अब और सुर्ख न करना मेरे आइने को
हम फिर साथ होंगे..हम फिर साथ होंगे..
                                                                                                       Missing you..hubby!
                                                                                                

9 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्यारी रचना ...
    :-)

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  2. वल्लाह.. दर्द को इतनी खूबसूरती से लवाजमा पहनाया है कि 'वाह' ही निकली बस.. :-)

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  3. यादों के सुन्दर मंजर ......

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  4. तुम्हारी हर इच्छा पूरी हो
    ना विरह ना तन्हाइयां हो
    God Bless U

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  5. जरुर साथ होंगे आप दोनों ! शुभकामनाएं !
    प्यारी रचना !

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  6. विरह के मोती अधिक दिन नहीं रहते ... खत्म हो जाते हैं वो जल्दी ... भावपूर्ण अभिव्यक्ति ...

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  7. कल 27/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  8. खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।