Saturday, December 14, 2013

कल रात बहुत याद आए तुम..



कल रात बहुत याद आए तुम..
सर्द रात में ठण्डी हवा का झोंका बन..
मेरी राहतों का खलल बन..चले आये तुम।
मेरी तनहाइयां तेरी यादों से महकती रहीं,
क़तरा-क़तरा कर रूह में उतर आये तुम।

तेरी यादों के शहर में जाके हम,  
तेरी गोद में सर रख के सोने की ज़िद करते रहे
शिकवे-शिकायतें करते-करते, सिसकियां हज़ार भरते रहे।

तुम प्यारी सी मुस्कान लिए, मेरी सारी बातें सुनते रहे..
बालों में हाथ फेरकर, दर्द मेरे सोखते रहे,
मासूम सी नींद देके मुझे, एक बच्चा सा मुझमें खोजते रहे।

मैं चुप हो गयी कह कर..सिसकियां रुक गईं थक कर
फिर आंखें खोलने की ज़हमत न की मैंने,
और तुमने भी तो नहीं जगाया मुझको,
आंखें खोलीं तो बहुत ढूंढा तुमको,
फिर आंख का आंसू बन.. बह आये तुम
उफ्फ...कल रात बहुत याद आए तुम..!!

14 comments:

  1. क्या बात है ....वाह!

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  2. सुन्दर प्रस्तुति। बधाई।।।

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    1. शुक्रिया हिमांशु जी

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  3. Replies
    1. नीलिमा जी धन्यवाद आपका....

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  4. यादो के झरोखे से .......बहुत सुन्दर

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  5. यादें क्या न करवाए ........... :) सुंदरतम :)

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  6. बहुत खूबसूरत लिखा है आपने.. पूरी रात का मंज़र आँखों में तैर आया..:-)

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