Tuesday, November 5, 2013

चलो करें नयी शुरुआत..

आज भाई दूज पर सब अपने भाइयों के साथ होते हैं। जो साथ नहीं होते वो बात ज़रूर करते हैं और जो बात न कर सकें तो याद बहुत करते हैं.. मैं भी आज अपनी तीनों बहनों को याद कर रही हूं.. और मेरे ह्रदय के ये भाव उन्हीं को समर्पित हैं.. 



चलो कुछ नया करें, कुछ ऐसा जो थोड़ा अलग हो
समाज के रीति रिवाज़ों से परे कुछ 
जिसे करके मन को सुकून मिले

दो त्यौहार जब आते हैं, उत्साह सारा ले जाते हैं
रक्षाबंधन और भाई दूज, कुछ कम है..ये कह जाते हैं

जिन बहनों के भाई नहीं, वो बहनें क्यों रहें उदास
क्यों न बन जातीं वो एक दूसरे की आस

चलो अब कुछ नया करें, हम चारों करें नयी शुरुआत
एक दूजे को बांधें राखी, और दूज पर करें तिलक

चलो भर दें उस रिक्तता को और लें वचन आज
बहनों को ही मानेंगे सबकुछ, देंगे हमेशा साथ
रक्षा करेंगे एकदूसरे की, न होंगे कभी उदास

ह़क रखेंगे एक दूसरे पर, प्रेम से रहेंगे साथ
  खुशियों में होंगे पास,  दुख-दर्द भी बांटेंगे साथ 
 चलो करते हैं ये नयी शुरुआत..


Love you all my lovely sisters !

21 comments:

  1. सही ,पुराने रीतिरिवाजों से यह एक नई सुरुआत
    बहुत अच्छा |
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट आओ हम दीवाली मनाएं!

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  2. बहुत अच्छा लगा यह अंदाज़।

    सादर शुभ कामनाएँ।

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  3. miss u guys a lot....love u all hamesha!!!

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  4. woww di..thanku so much for the lovely dedication
    luv u.. miss u
    :)

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  5. इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :- 07/11/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -40 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....

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  6. ये एक सार्थक शुरुआ़त होगी ... भावपूर्ण अभिव्यक्ति ...

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  7. अलग सा नया नवेला अंदाज :)
    शुभकामनायें !!

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  8. कल 07/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  9. सार्थक अभिवयक्ति......

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  10. भाई बहन के प्रेम में समय दिवार खड़ी करता है। …
    लेकिन समय समय के साथ मिल कर बहन ,बहन के प्यार में बढ़ोतरी करता है। ....
    U r lucky
    हार्दिक शुभकामनायें

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  11. बहुत ही अच्छी लगी मुझे रचना........शुभकामनायें ।

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  12. आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (13-04-2014) को ''जागरूक हैं, फिर इतना ज़ुल्म क्यों ?'' (चर्चा मंच-1581) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर…

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  13. बहुत बढ़िया रचना , पारुल जी धन्यवाद !
    new post -: साथी हाँथ बढ़ाना !

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  14. बहुत सुंदर रचना ! आपका यह जज्बा बहुत अच्छा लगा ! नारी अपने आप में सम्पूर्ण होती है फिर आप तो चार हैं एक साथ ! सोने पर सुहागा ! ढेर सारी शुभकामनायें !

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।