Tuesday, October 8, 2013

बहुत श्रद्धा है लोगों की देवी के प्रति


बहुत श्रद्धा है लोगों की देवी के प्रति
कितने प्रेम भाव से लगे रहते हैं दिन रात
उस मां को सजाने संवारने में..
फूल चुन चुनकर उसके चरणों में अर्पण करते हैं  
उसकी पूजा में कोई कमी भी नहीं रखना चाहते
कोई नौ दिन अन्न त्याग देता है
तो कोई मौन ग्रहण करता है
कुछ भी करके बस मां को प्रसन्न करना चाहते हैं।
न गरबा करते करते इनके पांव थकते हैं और 
न भजन-कीर्तन करते इनके गले में खराशें आती हैं
घर के मंदिर में विराजमान देवी मां
और बाहर पंडालों में सजी-धजी मां के प्रति 
प्रेम और श्रद्धा इन नौ दिनों में और भी उमड़ आती है
वहीं घर में बैठी एक जननी 'मैं' सोच रही हूं
क्यों इन लोगों को हर जगह मां नहीं दिखती
वो तो हर घर में विराजमान है
किसी की मां में, किसी की बेटी में 
किसी की बहन तो किसी की बहु में..
क्या हाथों में शस्त्र और सिंह की सवारी ही शक्ति का प्रतीक है
वो स्त्री जिसके हाथों में बेलन और तन पर सादे वस्त्र हैं
उसमें देवी क्यों नहीं ढूंढता कोई
उसके प्रति सम्मान में सर क्यों नहीं झुकाता कोई
क्यों देवी को पूजने वाली इस धरती पर 
औरत को शक्तिविहीन और भोगने की वस्तु समझा जाता है
क्यों हर रोज़ किसी बेटी के बलात्कार की खबर से अखबार सना रहता है..

बहुत श्रद्धा है लोगों की देवी के प्रति..


9 comments:

  1. श्रधा और दिखावा के बीच बहुत बारीक़ रेखा है...... सुन्दर......

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  2. आपकी लिखी रचना की ये चन्द पंक्तियाँ.........

    बहुत श्रद्धा है लोगों की देवी के प्रति
    कितने प्रेम भाव से लगे रहते हैं दिन रात
    उस मां को सजाने संवारने में..
    फूल चुन चुनकर उसके चरणों में अर्पण करते हैं

    बुधवार 09/10/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    को आलोकित करेगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

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  3. सही प्रश्न है आपका ... नारी का सामान तो हर हाल में होना चाहिए ... कुछ दिन की खान पूर्ती क्यों ... पूजन दिल से होना जरूरी है ...

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  4. aajkal logo ki shraddha bas mandiro tak hi simat k reh gayi hai...

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - बुधवार - 09/10/2013 को कहानी: माँ की शक्ति - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः32 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  6. श्रद्धा और दिखावा सदियों से चला आ रहा है यह सब ...सदियों से जमी जड़ों को एक झटके में उखाड़ फेंकना आसान नहीं इसके लिए एक नारी को ही शक्ति स्वरूपा माँ जैसा अखतियार कर बुराईयों के विनाश के लिए हरदम आगे कदम बढ़ाना होगा ...
    जय माता की

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  7. बहुत सटीक .............

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  8. बहुत ही सटीक रचना.....

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  9. दिखावा सदियों से चला आ रहा है ...बहुत सटीक रचना....

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।