Saturday, October 12, 2013

तुम बिन अधूरी हूं..


कितना भी दूर रहूं उससे 
वो अपने होने का अहसास कुछ इस तरह करा देता है 
मानो उसके बिना जीना मेरे लिए संभव नहीं
अपने रक्त में घुला महसूस करती थी जिसे 
उससे दूर होने की कल्पना भी न की थी कभी 
फिर भी खुद से दूर कर देना चाहती थी मैं
पर देखो न..
कितना खिंचाव है इन सात सुरों की सरगम में
साज और आवाज़ के मधुर मिलन में
ताल की गमक और अलफाज़ की रूमानियत में
रोम-रोम को आनंदित करते इस संगीत में 
कि मेरे अस्तित्व पर ही कब्ज़ा किये बैठे हैं
ये न हो तो मैं खुद जैसी नहीं लगती मुझको
लोग पहचान नहीं पाते इनके बगैर मुझको
और ये संगीत ..
रूह जैसे खींचता रहता हो अपनी तरफ
अजीब सा खिंचाव है जो 
जीवन में होकर भी मुझे गुम कर देता है 
और न होकर मुझे रिक्त 
इस कदर घुल गया है मुझमें कि 
अब आंखों से आंसू बनकर बहता है।
हां मान लेती हूं कि तुम जीत गये मुझसे 
और हार गयी मैं खुद से..
अब तुम ही हो 
जो मुझे सुकून दे पाओगे
तुम बिन अधूरी हूं..
तुम ही पूर्ण कर पाओगे।

11 comments:

  1. very beaautiful...han toh start karo na music phir se :)

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  2. नमस्कार आपकी यह रचना कल रविवार (13-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - रविवार - 13/10/2013 को किसानी को बलिदान करने की एक शासकीय साजिश.... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः34 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra

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  4. प्रेम की बिन प्रेम अधुरा ही रह जाता है,,,
    कोमल भावपूर्ण रचना...
    विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ...
    :-)

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति,विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  6. प्रेम को अंतस तक .. गहरे तक महसूस कर के लिखी रचना ...
    दशहरा की मंगल कामनाएं ...

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  7. विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं

    बहुत सुंदर
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    सादर

    आग्रह है- मेरे ब्लॉग में भी समल्लित हों
    पीड़ाओं का आग्रह---
    http://jyoti-khare.blogspot.in


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  8. और हार गयी मैं खुद से..
    अब तुम ही हो
    जो मुझे सुकून दे पाओगे
    तुम बिन अधूरी हूं..
    तुम ही पूर्ण कर पाओगे।------

    prem ka maheen ahsas

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  9. अक्सर प्रेम अधुरा ही रह जाता है :))

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