Friday, October 4, 2013

हां..सिर्फ अपने आप से मतलब रखूंगी


हां..सिर्फ अपने आप से मतलब रखूंगी
तुमको अब न सताऊंगी, 
तुम्हारी ज़िन्दगी तुम्हारी है..
ह़क अपना न कभी जताऊंगी।

नहीं देखूंगी तुम्हारे चेहरे की उदासी कभी
समझ के भी नासमझ सी बन जाऊंगी
जब खामोश भी रहोगे न तुम
कुछ भी कहने को न कह पाऊंगी।

जो खो जाओगे उलझनों के भंवर में तुम
हाथ तुम तक न अपना बढ़ाऊंगी
पुकार लेना मुझे चाहे कितनी दफ़ा
मैं चेहरे पर अपने शिकन न लाऊंगी

जब कुछ अच्छा न लगे तुमको कभी
मैं न गीत अपने गुनगुनाऊंगी
बातों से कभी अपनी न मन तुम्हारा बहलाऊंगी 
होंठ सी लूंगी अपने, बस..खामोश रह जाऊंगी 

तुम्हारी ज़िन्दगी तुम्हारी है..
ह़क अपना न कभी जताऊंगी।

जो खोज न पाओ मुझे कहीं भी अगर
एक नज़र देख लेना दिल में मगर
जो कोना वीरान सा दिखे अगर
समझ लेना मैं हूं खड़ी उधर
तेरे प्यार से बंधी हुई, 
मैं और कहां जा पाऊंगी
तेरी होकर जो तेरे साथ नहीं
तुझसे दूर मैं क्या जी पाऊंगी..

हां..सिर्फ अपने आप से मतलब रखूंगी
तुमको अब न सताऊंगी.. 

12 comments:

  1. अच्छी अभिव्यक्ति |
    जो खोज न पाओ मुझे कहीं भी अगर
    एक नज़र देख लेना दिल में मगर
    जो कोना वीरान सा दिखे अगर
    समझ लेना मैं हूं खड़ी उधर
    तेरे प्यार से बंधी हुई,
    मैं और कहां जा पाऊंगी
    तेरी होकर जो तेरे साथ नहीं
    तुझसे दूर मैं क्या जी पाऊंगी..............
    विरह बेदना और अंतर्मन के द्वंदो से भरी रचना |

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  2. मार्मिक उद्दगार...... सुन्दर ....

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  3. दिल से लिखी बात दिल तक पहुँचती है और बहुत मार्मिक भी होती है....!!!

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  4. तेरी होकर जो तेरे साथ नहीं
    तुझसे दूर मैं क्या जी पाऊंगी..

    हां..सिर्फ अपने आप से मतलब रखूंगी
    तुमको अब न सताऊंगी..

    आपने ही सब कह दिया अब क्या कहूँ……………दिल का सारा दर्द उँडेल दिया है।

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  5. नमस्कार आपकी यह रचना कल शनिवार (05-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  6. "जो खोज न पाओ मुझे कहीं भी अगर
    एक नज़र देख लेना दिल में मगर
    जो कोना वीरान सा दिखे अगर
    समझ लेना मैं हूं खड़ी उधर"


    लाजवाब अभिव्यक्ति।

    सादर

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  7. कल 06/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  8. मार्मिक अभिव्यक्ति ..
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ .
    नई पोस्ट : नई अंतर्दृष्टि : मंजूषा कला

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  9. बेहतरीन ये ख़ामोशी अच्छी लगी

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  10. मर्मस्पर्शी पंक्तियाँ

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  11. मुश्किल होता है प्रेम में अपनों से दूर रहना ... कहीं न कहीं तो सामजस्य करना हो होता है ...

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