Wednesday, October 30, 2013

मुझे सताने के तरीक़े..




मुझे सताने के तरीक़े
तुम्हें अच्छे से आते हैं..
मैं जानकर नाराज़ होती हूं तुमसे 
और तुम जानकर 
मनाते नहीं मुझको

कभी-कभी की बात न रही अब ये
हर रोज़ अनजाने बन जाते हो तुम
रोज़ाना तेरी आंखों में प्यार खोजती हूं
रोज़ाना मेरी आंखों से बह जाते हो तुम

तेरी बेरुखी से बढ़कर
कोई सज़ा न होगी मेरे लिए
खुद ब खुद मर जाऊंगी एक दिन
दो चार बार और
बस मुंह फेर लेना मुझसे..


12 comments:

  1. " रोज़ाना तेरी आंखों में प्यार खोजती हूं
    रोज़ाना मेरी आंखों से बह जाते हो तुम"

    क्या बात कही आपने....वाह!


    सादर

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  2. मैं जानकर नाराज़ होती हूं तुमसे
    और तुम जानकर
    मनाते नहीं मुझको
    ....वाह....

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  3. आत्मीयता से भरी सुन्दर पंक्तियाँ.

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (02-11-2013) "दीवाली के दीप जले" चर्चामंच : चर्चा अंक - 1417” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  5. यूँ लगा जैसे हर दिल की आवाज़ है यह -बहुत सुन्दर
    दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं
    नई पोस्ट हम-तुम अकेले

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  6. सुन्दर प्रस्तुति………

    काश
    जला पाती एक दीप ऐसा
    जो सबका विवेक हो जाता रौशन
    और
    सार्थकता पा जाता दीपोत्सव

    दीपपर्व सभी के लिये मंगलमय हो ……

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपको और आपके पूरे परिवार को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    स्वस्थ रहो।
    प्रसन्न रहो हमेशा।

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  8. प्रेम में मरने की बात अच्छी नहीं ... ये रूठने मनाने के सिलसिले चलते रहना चाहियें ...
    दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

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  9. मज़ा आया इसलिए कि कहानी मेरी अपनी लगी
    हार्दिक शुभकामनायें

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