Saturday, September 7, 2013

मुझे मेरा स्पेस चाहिये !


अतीत की किताब के कुछ पन्ने आज उलटने बैठी हूं
छोटी-छोटी कितनी ही बातों पे तुम मुझ पर निर्भर रहते
'सुनो ज़रा पानी देना... सुनो ये काम कर देना'
'मेरा मोबाइल तो चार्जिंग पर लगा दो प्लीज़'
'यार वो पेपर ढूंढ़ दो न प्लीज़...'
'जब देखो कुछ न कुछ करती रहती हो...मैं जब घर आऊं तब कुछ न किया करो
मेरे पास बैठो...मुझसे बात करो... फालतू के काम मत करो न..'।
मेरे वक़्त पर भी तुम हक़ जताकर बैठे थे... 
मुझे मेरे लिये सिर्फ उतना ही समय मिलता जब तक तुम बाहर रहा करते...
और उस समय को मैं बड़ी ही किफ़ायत से खर्च करती।
कभी-कभी खीज होती.. और चिल्ला कर कह देती थी मैं... मुझे 'मेरा' समय चाहिये... 
थोड़ा सा स्पेस दे दो प्लीज़। 
अरे ये क्या... आंखों की नमी बढ़ क्यों गई... 
क्यों आज इतनी पुरानी बातें सोचने लगी
क्यों आज से पहले बीता वक़्त याद नहीं आया...
.
.
.
.
अब स्पेस मिल गया है...
जिसमें गुमी मैं... खुद ही को खोज रही हूं ।



18 comments:

  1. नमस्कार आपकी यह रचना कल रविवार (08-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

    ReplyDelete
    Replies
    1. ब्लाग प्रसारण पर मेरी रचना को जगह देने के लिए आपका शुक्रिया।

      Delete
  2. होता है अक्सर ऐसा!!

    ReplyDelete
  3. स्त्री मन की पीड़ा को शब्दशः व्यक्त करती भावपूर्ण कविता ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. शालिनी जी.. सादर धन्यवाद

      Delete
  4. स्पेस तो चाहिए पर कई बार साथ बिताए पल ज्यादा जरूरी होते हैं ... जीवन तो उन्ही पलों में बसा रहता है ..

    ReplyDelete
  5. कल 09/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. अपने मंच पर जगह देने के लिए शुक्रिया सर

      Delete
  6. अंतर्द्वंद ----------सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  7. बेहतरीन, अंतर की आवाज़ कोखूबसूरत और प्रभावशाली शब्दों मे ढाला बधाई

    ReplyDelete
  8. सुंदर और भावपूर्ण मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति.....

    ReplyDelete
  9. कौशल जी, कुशवंश जी और अदिति जी... मेरे उत्साहवर्धन के लिए सादर धन्यवाद

    ReplyDelete
  10. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

    ReplyDelete
  11. 'जब देखो कुछ न कुछ करती रहती हो...मैं जब घर आऊं तब कुछ न किया करो
    मेरे पास बैठो...मुझसे बात करो... फालतू के काम मत करो न..'।
    ....... ये पोस्ट भी बेह्तरीन है
    कुछ लाइने दिल के बडे करीब से गुज़र गई....

    ReplyDelete

आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।