Friday, September 13, 2013

नौकरी...


किसी की रोजी तो किसी की रोटी है नौकरी
कोशिशें हज़ार करके भी नहीं मिलती नौकरी
किस्मत में नहीं..तो कहीं किस्मत चमकाती है नौकरी
किसी का गौरव है ऊंचे औहदे की नौकरी
तो किसी भूखे बच्चे के हाथों की रोटी है नौकरी
पैसे वालों को भले भाती नहीं ये नौकरी
छोटी-बड़ी.. कैसी भी.. पर मिले तो ये नौकरी
हज़ारों की भीड़ से किसी एक को मिलती है नौकरी
मिन्नतें किसी की, किसी की शिक्षा का फल है नौकरी
किसी के लिए आज़ादी होती है नौकरी
एक परिवार का भविष्य होती है नौकरी
मिल जाये तो छोड़ी न जाये नौकरी
पर जब अहम टकरायें, तो काहे की नौकरी
क्या औरत और मर्द की क़ाबिलियत में फ़र्क करती है नौकरी
नौकरी छूट जाये तो क्या दर्द में फ़र्क करती है नौकरी
फिर क्यों बहुओं की छुड़वाई जाती है नौकरी..
कोई क्यों समझता नहीं है मुझे..
मैं औरत हूं तो क्या.. मेहनत से मैंने भी कमाई थी नौकरी 
मुझे भी बहुत प्यारी थी ये नौकरी 
मेरे बाबा की मेहनत...मेरी मां का ख्वाब थी ये नौकरी ।


17 comments:

  1. सुंदर लेखन |नौकरी बहुत कुछ हैं ,सारा जीवन तो इसी के आगे-पीछे चकरघिन्नी की तरह घूमते कट जाता हैं |

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  2. मेरे बाबा की मेहनत...मेरी मां का ख्वाब थी ये नौकरी ......सुंदर

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  3. कल 15/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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    1. आपका शुक्रिया सर

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  4. "फिर क्यों बहुओं की छुड़वाई जाती है नौकरी.."


    सुधार तो काफी हुआ है. लेकिन उम्मीद है अगले १०-१५ वर्षों स्थिति बिलकुल ठीक हो जायेगी.

    सुन्दर रचना.

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    1. उम्मीद पर दुनिया कायम है...

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार - 15/09/2013 को
    भारत की पहचान है हिंदी - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः18 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





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    1. आपका धन्यवाद दर्शन जी

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  6. एक परिवार का भविष्य होती है नौकरी
    मैं औरत हूं तो क्या.. मेहनत से मैंने भी कमाई थी नौकरी
    बिलकुल सच कहा आपने पारुल जी ....प्रशंसनीय रचना

    सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं!!!

    @ संजय भास्‍कर

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    1. उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया संजय जी

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  7. फिर क्यों बहुओं की छुड़वाई जाती है नौकरी..
    कोई क्यों समझता नहीं है मुझे...

    इस बात को लेकर कोई कैसे समझा सकता है .. गलत तो गलत ही रहना है हमेशा ...
    नौकरी के विभिन्न आयामों को लिखा है आपने .. बहुत खूब ...

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    1. जब गलत सुधरता नही दिखता तब दुख होता है...

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  8. bhaut khoob....har shabd sachha hai

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  9. कल 17/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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