Monday, September 2, 2013

कहां हो तुम...?


कहां हो तुम...?
ये तुम.. जो मेरे सामने हो
या कि वो.. जो बसा है मेरे मन के एक कोने में..
जिसने सुनहरे पलों को थामे रखा है अपने हाथों में ...
फूल की कोमल पंखुड़ियों की तरह।
वही पल जिन्हें साथ मिलकर जोड़ा था
वही पल जिसका हर रंग प्रेम से भीगा था  
सुखद, सुंदर वो गुलाबी पल..

ये तुम जो मेरे सामने हो..बड़े ही मतलबी से लगते हो 
चेहरा तो जाना पहचाना सा है..पर अजनबी से लगते हो।
मेरे कांधे.. तेरे हाथों की गर्मी को तरसते हैं
और आंसू.. तेरे हाथों की नर्मी का इन्तज़ार करते हैं

कई बार कोशिश की
के खेंच कर बाहर ले आऊं तुम्हें.. मन के उस कोने से
पर मेरी कोशिशें नाकाम थीं..तेरी व्यस्तताएं अब आम थीं..

काश के तुम.. वही तुम बन जाओ
मन के कोने से निकलकर सामने आ जाओ
और वो पंखुडियां जो तुमने संभाल रखी हैं
मेरे व्याकुल से मन पर बिखेर जाओ
फिर से तुम.. तुम बन जाओ !

29 comments:

  1. Good.. very good.. Aapke ye shabd kuch kuch apne se lagte hai..

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  2. Good.. very good.. Aapke ye shabd kuch kuch apne se lagte hai..

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  3. खूबसूरत अभिव्यक्ति पारुल जी |

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  4. कोमल भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति
    :-)

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    1. धन्यवाद रीना जी

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  5. feelings nicely expressed di..again a good one :)

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  6. Nice Lines ....कई बार कोशिश की
    के खेंच कर बाहर ले आऊं तुम्हें.. मन के उस कोने से
    .... bahut acchhi panktiyan.....bahut sundar nazm Parul ji :)

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  7. समय की बदलाव को कभी कभी मन सह नहीं पाता ... लौटना चाहता है उसी पुराने प्रेम में ... पाना चाहता है उसे उसी रूप में ... यही तो प्रेम है ...

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    1. बिल्कुल सही कहा आपने

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  8. बेहतरीन मर्मस्पर्शी कविता।

    सादर

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  9. बेहद मार्मिक रचना...अद्भुत...

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    1. सराहने के लिए शुक्रिया...

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  10. अच्छी रचना है, अपनी भावनाओं को व्यक्त करना आपको खूब आता है,

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    1. सुनील जी ... आप भी न :)

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  11. सुन्दर पंक्तियाँ.

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  12. बहुत खूबसूरत भावपूर्ण रचना ! कोमल भावनाओं की हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति ! शुभकामनायें !

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    1. आपके comments मुझे ऊर्जा देते हैं...thankyou so much !

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  13. बहुत खूबसूरत कोमल भाव

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    1. धन्यवाद वंदना जी...

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  14. खूबसूरत....कोमल .. भावपूर्ण ...पंक्तियाँ.

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    1. कौशल जी आपको धन्यवाद

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  15. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  16. feelings yes ...
    hindi ... you need improvement ...
    but medium hardly matters when feelings are pure

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