Thursday, August 15, 2013

कैसे कह दूं कि.. मेरा देश महान !



भूख और बेरोज़गारी चौराहों पर रोज़ खड़ी मिलती है,
फबतियां कसती तो कहीं चैन खिंचती दिखती है,
मैं कैसे कह दूं कि मेरा देश महान..

देश को मां कहने वाले, बेटियां पैदा होने पर डरते हैं..
क्योंकि बेटियां बेआबरू कर कहीं भी फेंक दी जाती हैं
मैं कैसे कह दूं कि मेरा देश महान..

खून से लिपटे हाथ कानून के पानी से अकसर धुल जाते हैं
न्याय का इंतज़ार तकते, आंखें अकसर बंद हो जाया करती हैं
मैं कैसे कह दूं कि मेरा देश महान..

देश की हिफाज़त करते सिपाहियों के सर नहीं मिलते
सच्चे अफ़सरों की ईमानदारी यहां मज़ाक बन जाती है
मैं कैसे कह दूं कि मेरा देश महान..

देश चलाने वाले जब अपनी जेबें भरते हैं
देश में रहनेवाले तब महंगाई के आंसू रोते हैं
मैं कैसे कह दूं कि मेरा देश महान..

बेईमानी और भ्रष्टता जब हाहाकार मचाती है
बच्चों के खाने में कीड़े पड़ जाया करते हैं
मैं कैसे कह दूं कि मेरा देश महान..  




5 comments:

  1. yeh mera India....Incredible India!!!

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  2. बहुत ही मार्मिक किन्तु कटु सत्य भरी रचना |


    “प्रेम ...प्रेम ...प्रेम बस प्रेम रह जाता हैं|”

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  3. बेईमानी और भ्रष्टता जब हाहाकार मचाती है
    बच्चों के खाने में कीड़े पड़ जाया करते हैं
    मैं कैसे कह दूं कि मेरा देश महान..
    ............ कटु सत्य कहाँ है आपने अपनी रचना में |

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  4. कडुवे सच को मानने का दिल नहीं करता ...

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