Tuesday, July 9, 2013

तेरे रंग..



तेरे ही रंग, रंग रंग गए
रग रग मेरे.. अंग अंग मेरे,
रग रग में रंग...रंग रंग में तुम
तुम तुम में मैं, मुझ मुझ में तुम
मुझ में घुले.. हर रंग तेरे ...
ओस से धुले..खुशबू मिले..
भीगता मन..तेरे प्यार में हरदम 
तुझसे ही महकती.. 
तुझमें ही रंगी.. मैं..!

8 comments:

  1. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति, यहाँ भी पधारे
    रिश्तों का खोखलापन
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_8.html

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    1. आभार... शौर्य जी

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  2. kya baat......kyaa baat....kya baat....

    rangeen rachna ke liye haardik badhaayi.

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  3. Beautiful as always.
    It is pleasure reading your poems...Parul ji

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  4. उस ईश्वर से एकाकार होना .. श्रृष्टि से प्राकृति से मिलन है ... आलोकिक है ...

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  5. भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  6. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति,

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  7. सुंदर अभिव्यक्ति,

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