Friday, May 24, 2013

तेरे बिना...


तेरे बिना ....कैसे कहूं, 
ये जीवन कितना सूना है..
सबकुछ पास है मेरे यहां,
पर लगता कुछ छूट गया
चेहरे पर तो हंसी है लेकिन 
अंदर कहीं कुछ टूट गया
याद है मुझे मैंने कहा था..
ये कठिन पल ढल जाएंगे
पर मुझे कहां मालूम था कि 
ये पल इतना रुलाएंगे 
एक पल बीते दिन दिन जैसा, 
और दिन मेरे साल हुए
ये कैसा बदलाव है आया, 
तुम बिन हम बेहाल हुए
आधा आधा बांट के हमने 
पूरा हर एक काम किया
तुम संग होते तो ये पल भी 
बांट के आधे हो जाते
तेरे बिना कैसे कहूं...
ये जीवन कितना अधूरा है
आज कहीं अहसास हुआ कि 
तुमसे सब कुछ पूरा है ..

                                                      Missing you !

6 comments:

  1. शुभम
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (27-05-2013) के :चर्चा मंच 1257: पर ,अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें
    सूचनार्थ |

    ReplyDelete
  2. सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. बहुत ही अनुपम प्रस्‍तुति है

    ReplyDelete
  4. bhaavpoorna rachna ..dard ko baya karti adhurepan ke ehsaas se jab dard ki nadi bhti hogi to kuch aisi hi uski juban hogi ...sundar

    मेरी नयी रचना Os ki boond: लव लैटर ...

    ReplyDelete

आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।