Sunday, September 23, 2012

मैं चाहती हूं..


मैं चाहती हूं कि तुम्हारा ख्याल रखूं
मैं चाहती हूं कि हर पल तुम्हारे साथ रहूं
रोज़ाना तुम्हें देखूं...तुमसे बात करूं

तुमने आंखों में जो छुपाए हैं मुझसे 
मैं वो सारे दर्द जान लूं
जो चाहकर भी कही नहीं..वो सारी बातें मान लूं

तुमने जो भी किया है मेरे लिए 
वो सब हमेशा याद रखूं
भूल न जाऊं वो बचपन..मैं हरपल उसे आबाद रखूं 

जो जागकर काट दीं मेरे लिए
वो रातें वापस कैसे करूं
जो प्यार लुटाया था मेरे लिए 
वो प्यार वापस कैसे करूं

मेरे बस में हो अगर, तो मैं खुद को तुममें समेट लूं
तुम्हारे आंचल की छांव में मैं थोड़ा खुद को भूल लूं
तुम्हारे हाथों के झूलों में मैं बीते सावन झूल लूं

ब्याह के इस दस्तूर से यूं तो बहुत कुछ पाया है
पर न जाने किस बेदर्द ने ये दस्तूर बनाया है
पाने से ज्यादा खोया है.. खोकर सब..कुछ पाया है

मैं चाहती हूं कि तुम्हारा ख्याल रखूं
मैं चाहती हूं कि हर पल तुम्हारे साथ रहूं
रोज़ाना तुम्हें देखूं...तुमसे बात करूं..

..dedicated to my loving Parents!