Monday, February 13, 2012

हम तुम जब साथ होते हैं..



हम तुम जब साथ होते हैं
समां कुछ और ही होता है
दिलों में रंगीनियां, महकती हवाएं
चमकती आंखें और हंसते हुए होंठ होते हैं

मेरी तनहाइयां कुछ यूं हवा करते हो तुम
कि फिज़ाओं में सरगम गाती है
और मेरे गेसुओं से तेरी खुशबू आती है 

हाथ मेरे तेरे हाथों में कुछ इस कदर उलझ से जाते है
पलाश के पेड़ पर जैसे कोई बेल लिपटी जाती है

तेरी झील सी आंखों की कशिश
मेरी आंखों को एक रंग नया देती है
सुरमई शाम फिर और गहराई जाती है

मेरी आंखों से फिर छलकते हैं..मुहब्बत के सागर
और तुम..दिल बनके मुझमें धड़कने लगते हो

तेरी बातों की खुशबू जब मुझसे टकराती है 
महकी महकी सी मेरी हस्ती हो जाती है
मेरा सर तेरे कांधे पर टिक जाता है
मन भावुक होकर तेरे प्यार से भीग जाता है

मैं चाह कर भी तुझसे दूर जा नहीं सकती
मेरी धड़कन में तुम और ज़हन में 
तुम्हारा ही ख़याल बसता है
खुद से जुदा रह भी लूं लेकिन
तेरे बगैर रहना ख़्वाब सा लगता है..!





Sunday, February 5, 2012

सपने..


ठहरी हुई झील है या बरसता झरना
डूब सी जाती हूं उसकी चमकती आंखों में
ये चमक मेरी आंखों में भी घुल जाती है
और पानी की तरह बस.. बह जाती है
ये बहता पानी सिर्फ पानी नहीं
बहुत सारे अरमानों और सपनों की जुंबानी है
वो सपने जो तैरते हैं उसकी आंखों में
और पूछते हैं मुझसे..
क्या पूरे होंगे कभी..?
उन सपनों में जाती हूं 
उन्हें चुन चुन कर लाती हूं
संजोकर अपनी आंखों में  
उनको अपना बना लेती हूं...
पर सपने है..फिर पूछते हैं मुझसे.. 
क्या पूरे होंगे कभी..?
और मैं एक मां.. उन सपनों से कहती हूं
थोड़ा सब्र करो..कुछ और बढ़ो..
मैं संवारूंगी तुम्हें.. अब तुम मेरे हो...