Tuesday, January 24, 2012

Do you Know ?

A giant iceberg, lager in area than New York City, could break away from Antarctica by 2012.

Sunday, January 22, 2012

Do you know ?

Mahatma Gandhi covered the 1932 Olympic games in Los Angeles as a reporter.

Saturday, January 21, 2012

HOME REMEDIES- गाजर


गाजर (Carrot)- वैज्ञानिक नाम-Daucus carota L.var. sativa DC. इसे हम गार्जर, शर, गज्जर आदि नामों से भी जानते हैं। गाजर प्रायः लाल होती है लेकिन ये पीले और काले रंग में भी पाई जाती है। गाजर की सिर्फ सब्जी ही नहीं बनाई जाती, हलवा, मुरब्बा, अचार, जूस आदि भी लोगों को बहुत पसंद आते हैं। इसके अलावा यदि गाजर के औषधीय गुणों को भी अपना लिया जाये, तो क्या कहने।
गाजर में प्रोटीन, वसा , कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम फास्फोरस, लोहा आदि पाये जाते हैं। इसमें vitamin A,B,C पाया जाता है।

औषधीय प्रयोग-
ह्रदय रोग- कद्दूकस की गई गाजर को दूध में पकाकर शक्कर मिलाकर खीर की तरह खाने से ह्रदय को शक्ति मिलती है और खून की कमी दूर होती है।
खांसी- गाजर के रस में मिश्री और काली र्मिच मिलाकर चाटने से खांसी मिटती है और कफ़ निकल जाता है।
सूजन- पीड़ित को गाजर की तरकारी खानी चाहिए।
जलन- उबली गाजर को पीसकर जले हुए स्थान पर लगाने से जलन मिटती है।
प्रसव कष्ट- प्रसव कष्ट कम करने के लिए गाजर के 10 ग्राम बीज और 100 ग्राम पत्तों का काढ़ा बनाकर पिलाने से कष्ट कम होता है।
नेत्र ज्योति- गाजर के रस को सौंफ के साथ लेने से आंखों की रौशनी बढ़ती है।

गाजर का जूस रोजाना पीने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, कीटाणुओं और इन्फैक्शन का असर नहीं होता। त्वचा में चमक आती है। हड्डियां मज़बूत और खून बढ़ता है। गाजर को अपने खाने में शामिल करें और इसके गुणों का लाभ उठायें।


Tuesday, January 10, 2012

वो मेरा अपना है...


उसके बारे में सोचूं...तो कुछ अजीब लगता है
वो मेरा अपना है, मेरे हर पल करीब रहता है
कभी लगता है इसने ऊंचाइयां तमाम छू लीं
इतना खुश तो इसे कभी कभी देखा है

ये कभी अपनी उड़ान थाम लेता है
सहम जाता है कभी, कभी खुद को रोक लेता है
बैठ जाता है किसी कोने में...घबराके
मुझको अकसर ये कुछ मायूस सा लगता है 

इतना मजबूर न समझना उसको
वो मुझ में अपना एक मकाम रखता है
खुद को हरपल वो मज़बूत किये चलता है
गिरता है टूट जाता है, टूटकर फिर संभलता है

क्या है जो खुद में लिये फिरता है
समेटकर सबकुछ..मुझमें रंग नए भरता है
कुछ यादें, कुछ अरमान ...कुछ ग़म की दासतानें
जीवन के फ़लसफ़े, उम्मीदों के सिलसिले...
ये मेरा दिल है.. 
मुझको हरपल ये ज़िंदा रखता है।।

Monday, January 2, 2012

नेता और अफ़सर



हमारे जनप्रतिनिधि और अफसर देश को चला रहे हैं। हमारे नेता अकसर अपने बयानों के माध्यम से अपनी सोच का परिचय देते हैं। हमारे कुछ नेता अवसर मिलते ही साबित कर देते हैं कि उन्हें जनता की कितनी चिंता है.. करप्शन और लोकपाल के मसले पर चली नौटंकी सारे देश ने देखी है। इसी तरह हमारे अफसर भी पीछे नहीं है। हम यहां बात कर रहे हैं कर्नाटक के महिला और शिशु कल्याण मंत्री सी सी पाटिल की।
श्री पाटिल कहते हैं.. मैं निजी तौर पर इस हक में नहीं हूं कि महिलाएं भड़काऊ कपड़े पहनें और यह सोचें कि वे चाहे जो पहनें उन्हें सम्मान की नज़रों से देखा जाए।' उन्होंने यह भी कहा कि महिला को पता होना चाहिए कि उन्हें कितनी चमड़ी ढकनी है। पाटिल ने कहा कि बलात्कार और यौन छेड़छाड़ के मामले तभी होते हैं जब पुरुषों के नैतिक मूल्य में गिरावट आ जाती है। साथ ही महिलाएं भड़काऊ कपड़े पहनकर पुरुषों की नैतिकता को गिरा देती हैं।
इनसे पहले आंध्र प्रदेश के डीजीपी वी. दिनेश रेड्डी ने भी यह कहकर सबको चौंका दिया था कि महिलाओं के हल्के कपड़े बलात्कार के लिए जिम्मेदार हैं।
इन नेताओं के बयान पुरूषवादी सोच से 2 कदम आगे जाकर एक संकरी गली में मुड़ते हैं। जहां से ये सारी दुनिया को एक संकीर्ण मानसिकता का संदेश देना चाहते हैं। इन्होंने ये बताने की कोशिश की है कि अकसर होने वाले अपराधों के लिए पीड़ित पक्ष ही ज़िम्मेदार होता है.. कम से कम महिला अपराधों पर तो इन्होंने अपना नज़रिया साफ कर दिया है.. हम तो कर्नाटक की जनता के बेहतर भविष्य के लिए कामना ही कर सकते हैं। इसी तरह की स्थिति आंध्र प्रदेश की कानून व्यवस्था की लग रही है।

Sunday, January 1, 2012

उम्मीदों का साल...


चलते चलते 2011 भी चला गया.. और ले गया अपने साथ अपनी ही दी हुई उन अच्छी-बुरी यादों को, जिनके साथ जीते हुए हम आज फिर से एक नये साल का स्वागत कर रहे हैं। और ये नया साल आज फिर से नयी ऊर्जा, नई उमंग के साथ हमारे जीवन में शामिल हो चुका है.. नये साल में बहुत सारी उम्मीदें हैं, सभी ने अपने छोटे-छोटे सपनों को आंखों में संजोए रखा है। मन में उन तमाम चीजों का हिसाब रखा है.. जो बीते साल कर नहीं पाए, जो बीते साल जुटा नहीं पाये, फिर से मन में वही उम्मीद कि इस साल तो ये कर ही लेंगे, इतना तो बचा ही लेंगे.. अपनी ख्वाहिशों को विराम देंगे और अपने बच्चों की हर ज़रूरत को पूरा करेंगे.. उनसे ये नहीं कहेंगे कि बेटा फिर दिला देंगे। अपने लिए भी कुछ सोच रखा है.. सबने अपने आप को कहीं छुपा रखा है.. किसी को इस साल कुछ नया करना है.. किसी को हर हाल में नौकरी करना है.. किसी को अपनी नौकरी को बचाए रखना है.. किसी को उम्मीद है कि इस बार तो प्रमोशन मिल ही जायेगा.. तो किसी की उम्मीद में कोई है.. उम्मीद है कि घर में कोई नन्हा आएगा.. उम्मीद है कि घर का बुज़ुर्ग बिल्कुल ठीक हो जाएगा। किसी के सपनों में चार पहिए.. तो किसी की आंखों में चार दीवारों का ख़्वाब.. ख़्वाब कुछ छोटे.. ख़्वाब कुछ बड़े.. ख़्वाब कि इस साल तो अच्छे नंबर ले ही आना है.. ख़्वाब कि मुझे भी मैरिट में आना है। ख्वाबों के सिलसिले.. कभी न ख़त्म होने वाले.. कभी भी जन्म लेने वाले और किसी भी पल टूटकर बिखरने वाले.. काश कि सबके सारे ख़्वाब सच हों.. सारी उम्मीदें उनकी उम्मीद से बढ़कर हों.. नये साल की नई उम्मीद के साथ नये साल का स्वागत है...