Sunday, September 23, 2012

मैं चाहती हूं..


मैं चाहती हूं कि तुम्हारा ख्याल रखूं
मैं चाहती हूं कि हर पल तुम्हारे साथ रहूं
रोज़ाना तुम्हें देखूं...तुमसे बात करूं

तुमने आंखों में जो छुपाए हैं मुझसे 
मैं वो सारे दर्द जान लूं
जो चाहकर भी कही नहीं..वो सारी बातें मान लूं

तुमने जो भी किया है मेरे लिए 
वो सब हमेशा याद रखूं
भूल न जाऊं वो बचपन..मैं हरपल उसे आबाद रखूं 

जो जागकर काट दीं मेरे लिए
वो रातें वापस कैसे करूं
जो प्यार लुटाया था मेरे लिए 
वो प्यार वापस कैसे करूं

मेरे बस में हो अगर, तो मैं खुद को तुममें समेट लूं
तुम्हारे आंचल की छांव में मैं थोड़ा खुद को भूल लूं
तुम्हारे हाथों के झूलों में मैं बीते सावन झूल लूं

ब्याह के इस दस्तूर से यूं तो बहुत कुछ पाया है
पर न जाने किस बेदर्द ने ये दस्तूर बनाया है
पाने से ज्यादा खोया है.. खोकर सब..कुछ पाया है

मैं चाहती हूं कि तुम्हारा ख्याल रखूं
मैं चाहती हूं कि हर पल तुम्हारे साथ रहूं
रोज़ाना तुम्हें देखूं...तुमसे बात करूं..

..dedicated to my loving Parents!






13 comments:

  1. Yahi zamane kaa dastoor hai,
    jo meri gudiya,tumne bhi paya hai..
    tum humko bhool sako isiliye
    saas-sasur ke sath ek pyara sa gudda dilvaya hai.. :)

    Happy Daughter's day my sheruu !! :)

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  2. You ve given words to the feelings which we cant!!!

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  3. Its the pain of every married Indian girl!!!

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  4. Well...this could only have come from the deep rooted to the parents baby....amazing composition Parul...10 on 10....great work...all the best and more to come.

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  5. कल 02/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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    1. आभार आपका यशवंत जी!

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  6. भावपूर्ण......मार्मिक

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  7. हर पुत्री के जज्बातों के आलोड़न को आपने शब्द दे दिए .......

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  8. बेहद सुंदर एहसास और भावपूर्ण रचना....

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।