Thursday, April 19, 2012

व्यर्थ ही..






रुसवाइयों का आलम बहुत ही गहरा था,
चाहता तो हवाओं का रुख मोड़ सकता था।
व्यर्थ ही मैंने जीवन खो दिया,
मैं चाहता तो बहुत कुछ कर सकता था..।।


1 comment:

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