Monday, February 13, 2012

हम तुम जब साथ होते हैं..



हम तुम जब साथ होते हैं
समां कुछ और ही होता है
दिलों में रंगीनियां, महकती हवाएं
चमकती आंखें और हंसते हुए होंठ होते हैं

मेरी तनहाइयां कुछ यूं हवा करते हो तुम
कि फिज़ाओं में सरगम गाती है
और मेरे गेसुओं से तेरी खुशबू आती है 

हाथ मेरे तेरे हाथों में कुछ इस कदर उलझ से जाते है
पलाश के पेड़ पर जैसे कोई बेल लिपटी जाती है

तेरी झील सी आंखों की कशिश
मेरी आंखों को एक रंग नया देती है
सुरमई शाम फिर और गहराई जाती है

मेरी आंखों से फिर छलकते हैं..मुहब्बत के सागर
और तुम..दिल बनके मुझमें धड़कने लगते हो

तेरी बातों की खुशबू जब मुझसे टकराती है 
महकी महकी सी मेरी हस्ती हो जाती है
मेरा सर तेरे कांधे पर टिक जाता है
मन भावुक होकर तेरे प्यार से भीग जाता है

मैं चाह कर भी तुझसे दूर जा नहीं सकती
मेरी धड़कन में तुम और ज़हन में 
तुम्हारा ही ख़याल बसता है
खुद से जुदा रह भी लूं लेकिन
तेरे बगैर रहना ख़्वाब सा लगता है..!





8 comments:

  1. I wish you to live in peace and in perfect union at least till your golden jubilee!

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  2. अहसासों का बहुत अच्छा संयोजन है ॰॰॰॰॰॰ दिल को छूती हैं पंक्तियां ॰॰॰॰ आपकी रचना की तारीफ को शब्दों के धागों में पिरोना मेरे लिये संभव नहीं

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  3. आप का ह्र्दय से बहुत बहुत
    धन्यवाद,

    मेरे ब्लॉग से जुड़ने के लिए और बहुमूल्य टिपण्णी देने के लिए

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  4. बहुत ही सुंदर रचना
    प्यार मे पगी परी की उम्दा अभिव्यक्ति
    स्नेहाशिष
    हार्दिक शुभकामनायें

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।