Monday, January 2, 2012

नेता और अफ़सर



हमारे जनप्रतिनिधि और अफसर देश को चला रहे हैं। हमारे नेता अकसर अपने बयानों के माध्यम से अपनी सोच का परिचय देते हैं। हमारे कुछ नेता अवसर मिलते ही साबित कर देते हैं कि उन्हें जनता की कितनी चिंता है.. करप्शन और लोकपाल के मसले पर चली नौटंकी सारे देश ने देखी है। इसी तरह हमारे अफसर भी पीछे नहीं है। हम यहां बात कर रहे हैं कर्नाटक के महिला और शिशु कल्याण मंत्री सी सी पाटिल की।
श्री पाटिल कहते हैं.. मैं निजी तौर पर इस हक में नहीं हूं कि महिलाएं भड़काऊ कपड़े पहनें और यह सोचें कि वे चाहे जो पहनें उन्हें सम्मान की नज़रों से देखा जाए।' उन्होंने यह भी कहा कि महिला को पता होना चाहिए कि उन्हें कितनी चमड़ी ढकनी है। पाटिल ने कहा कि बलात्कार और यौन छेड़छाड़ के मामले तभी होते हैं जब पुरुषों के नैतिक मूल्य में गिरावट आ जाती है। साथ ही महिलाएं भड़काऊ कपड़े पहनकर पुरुषों की नैतिकता को गिरा देती हैं।
इनसे पहले आंध्र प्रदेश के डीजीपी वी. दिनेश रेड्डी ने भी यह कहकर सबको चौंका दिया था कि महिलाओं के हल्के कपड़े बलात्कार के लिए जिम्मेदार हैं।
इन नेताओं के बयान पुरूषवादी सोच से 2 कदम आगे जाकर एक संकरी गली में मुड़ते हैं। जहां से ये सारी दुनिया को एक संकीर्ण मानसिकता का संदेश देना चाहते हैं। इन्होंने ये बताने की कोशिश की है कि अकसर होने वाले अपराधों के लिए पीड़ित पक्ष ही ज़िम्मेदार होता है.. कम से कम महिला अपराधों पर तो इन्होंने अपना नज़रिया साफ कर दिया है.. हम तो कर्नाटक की जनता के बेहतर भविष्य के लिए कामना ही कर सकते हैं। इसी तरह की स्थिति आंध्र प्रदेश की कानून व्यवस्था की लग रही है।

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