Friday, December 30, 2011

नन्ही परी...


भगवान ने उसे भेजकर सबको हैरान कर दिया..
हमारे घर में फिर से खुशी आई थी....
उम्मीद से बढ़कर थी
तीन बहनों के बाद भी लाड़ली थी
घर में गीत गूंजा करते थे
मां के लिए 'बंधन' थी प्यार का
और पापा उसे 'नन्ही परी' कहते थे

प्यार दुलार की बहार चली
वो नन्हीं परी भी इतराई चली
कभी एक गोद, तो कभी दूसरी में गई
कभी प्यार लिया तो कभी देकर चली गई

उसका जन्मदिन कुछ ख़ास होता था
घर का सबसे छोटा सदस्य उस दिन राजा होता था
हर बार खुशियां मनाई जातीं
गुब्बारे, रिबन, केक और ढ़ेर सारी ़टॉफियां
मैं हर बार कमरा सजाती
प्यार से उसे बाहों में भर लेती
और छोटे-छोटे तोहफ़े
उसके छोटे छोटे हाथों में देती 

समय गुज़रता चला गया
जन्मदिन का चेहरा भी बदलता चला गया
अब न कमरा सजता था
न गुब्बारे, न रिबन, और न ढ़ेर सारी ़टॉफियां
वो छोटे छोटे तोहफ़े भी अब नहीं थे
ऐसा इसलिए नहीं था कि वो बड़ी हो गई थी
ऐसा इसलिए था कि उसकी बड़ी बहन वहां नहीं थी
वो तो वहीं है वैसी ही है, सबकी लाड़ली,
सबसे प्यारी...मेरी छोटी बहन

आज भी जी चाहता है 
उसका हर जन्मदिन वैसे ही मनाऊं
फिर से कमरा सजाऊं...
क्या करूं...कैसे उसके पास पहुंच जाऊं
कितने साल बीत गये
उसे तोहफ़े दिये हुए..
उसे बाहों में भरे हुए...
बहुत याद आते हैं वो दिन
वो गुब्बारे, वो रिबन, 
और उन सबसे प्यारी तुम...

सबसे प्यारी हो...सबकी प्यारी रहना
खुश रहना और सबको सुखी रखना
जन्मदिन की शुभकामनाएं !!

                                                        तुम्हारी बहन....

Sunday, December 25, 2011

आभार.....


मेरे ब्लाग के तमाम सुधि पाठक एवं मित्रों.. आप सभी का ह्रदय से आभार.. ये इसलिए कि मेरे ब्लाग की पाठक संख्या अब 2000 पार कर चुकी है। मेरे  लिए ये महज़ एक संख्या नहीं है.. इसमें छिपा है आप सभी का स्नेह.. मै नंबर गेम में यकीन नहीं करती.. लेकिन आप सभी की कसौटियों पर खरी उतरुंगी ये विश्वास अवश्य दिलाना चाहूंगी...

पारुल..

Thursday, December 22, 2011

वास्तु- सूत्र 5



कहते हैं कि भगवान हर जगह विद्धमान है। लेकिन हर घर में उनका एक अलग स्थान होता है। घर के वास्तु में सबसे महत्वपूर्ण है भगवान का स्थान। घर के मंदिर को सही दिशा में रखना बेहद ज़रूरी होता है।
पूजा स्थल ईशान कोण यानि घर की उत्तर-पूर्व (NORTH-EAST) दिशा में होना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पूजा करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो। ऐसा करने से सुख-समृद्धि और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।



Wednesday, December 21, 2011

कुछ कहना है...


कुछ कहना है, जो आज तक कभी कहा नहीं,
जो सालों से मन में था पर कभी दिखाया नहीं,
मुझे मौका तो दो...

अपनी दुनिया मुझे कहते हो, हर पल साथ रहते हो,
कहीं जाते ही नहीं, इंतज़ार करवाते ही नहीं
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम देर से घर क्यों आते हो?

मेरी ग़लतियों को क्यों हवा में उड़ाते हो,
उनपर हमेशा मुसकुराते हो
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम हमेशा मुझे ड़ांटते क्यों हो?

जब मैं खाने में नमक ज़्यादा डालती हूं
तुम कहते हो कि खाना अच्छा है,
खुश होकर वो भी खा लेते हो
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम मेरे खाने में कमियां क्यों निकालते हो?

मेरी इजाज़त के बग़ैर मेरी आंखें पढ़ लेते हो,
मेरे कहने से पहले मेरी बातें समझ लेते हो
मुझे शिकायत का मौका तो दो...
कि तुम मुझे समझते क्यों नहीं हो?

कभी जब कुछ करने का मन नहीं होता
तुम कैसे मेरे आलस्य को जान लेते हो
कहते हो आज बाहर खाने का मन है,
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम कभी मेरे बारे में क्यों नहीं सोचते?

सजना संवरना मुझसे नहीं होता
सोने चांदी का भी शौक़ नहीं है,
फिर भी मुझे हीरा तोहफ़े में देते हो
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम कभी मेरे लिए कुछ लाते क्यों नहीं?

रंग रूप, चमक-दमक, शक्लो सूरत में नहीं
तुम्हारी सोच के दर्पण में मैं कुछ और हूं कहीं 
कहते हो कि तुम सच्ची हो,
सबसे अलग और अच्छी हो
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम मेरी तारीफ़ क्यों नहीं करते?

सपने हमेशा मेरी आंखों में तैरते हैं
ढ़ेरों आकांक्षाएं साथ लिए चलती हूं,
तुमसे तुम्हारे सपने पूछे तो कहा,
तुम्हारे सपनों को सच करना ही सपना है मेरा
मुझे शिक़ायत का मौका तो दो...
कि तुम मेरे लिए कुछ करते क्यों नहीं?

कोई उम्मीद अब बाक़ी नहीं,
तुम मिले तो सबकुछ पा लिया,
मेरे अच्छे कर्मों का फल हो शायद
जो ईश्वर ने बिन मांगे दिया
और क्या अब मांगू उससे
उसने किस्मत में तुम्हें लिख दिया।



Wednesday, December 7, 2011

अभी और भी जीना है..



उगते सूरज ने आज मुझसे कहा
चलो, कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी चलना है
अभी और भी जीना है

ये बाल अब पकने लगे, 
माथे के बल भी बढ़ने लगे
आंखों की चमक खो रही 
होंठों की हंसी को बनाए रखना है 
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

मुश्किलों का क्या है, 
आएंगी जाएंगी
अभी और लड़ना है
अभी और जीतना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

जीवन के हर मोड़ पर 
तुम्हें पत्थर कई मिलेंगे
उनको संजोना है और
नाम अपना लिखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

ड़ालियों के फूल मुरझा न जाएं
उन्हें बागीचे में सजाए रखना हैं
हर सुबह सींचना है 
हर रात देखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

आंधियां तो आएंगी और सताएंगी
हवा ही तो हैं...हवा हो जाएंगी
बस चरागों की लौ को थामे रखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है