Wednesday, November 23, 2011

प्यार की कुछ क्यारियां..




प्यार की कुछ क्यारियां...मेरे पास ढ़ेर सारी हैं,
हर क्यारी प्यारी है, हर क्यारी न्यारी है।

कई सारे फूल खिलते हैं,  
अलग अलग रंगों में मिलते हैं।
कुछ चटख, कुछ कोमल, कुछ बड़े रंगीले से, 
कुछ लाल, कुछ नीले, कुछ पीले पीले से। 

उनकी ख़ुशबू कि जीवन महका जाए,
नरम इतने के रूह सुकून पाए।
पास हों तो आंखों में चमक होती है,
दूर हो जाएं तो आंसुओं की नमी होती है।

हर मौसम में हरे रहते हैं,
इन क्यारियों में हमेशा बसे रहते हैं।
कुछ फूल हैं शायद या ख़्वाब कहीं के, 
खिलते हैं यहां और आंखों में बसा करते हैं।।



HOME REMEDIES - मूली

मूली (Radish)- वैज्ञानिक नाम- Raphanus sativus L. इसे हम मूली, मूला, मुड़ा आदि नामों से भी जानते हैं। मूली को प्रायः हम सलाद में खाते हैं और मूली भाजी और मूली के पराठों के तो क्या कहने। स्वादिष्ट होने के साथ साथ मूली में औषधीय गुण भी होते हैं, जिन्हें जानकर कई परेशानियों से निजात पाई जा सकती है। मूली के बीज और जड़ से तेल भी निकाला जाता है जो उड़नशील होता है। 100 ग्राम मूली में 0.1 मिलीग्राम आर्सेनिक पाया जाता है।

औषधीय प्रयोग-
कंठशुद्धी- मूली के 5-10 ग्राम पिसे बीजों को गर्म पानी के साथ दिन में 3 बार फंकी लेने से गला साफ होता है।
श्वास- मूली का 500 मिलीग्राम से 2 ग्राम क्षार 1 चम्मच शहद में मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटने से श्वास रोग में लाभ मिलता है।
पाचन- मूली खाना खाने के बाद भोजन को पचाती है, पर भोजन के पहले खाने पर यह पचने में भारी होती है।
अम्लपित्त- मूली या मूली के पत्तों के 10-20 ग्राम रस में मिश्री मिलाकर खाने से लाभ होता है।
पेटदर्द- मूली के रस 25ml रस में नमक और पिसी कालीमिर्च डालकर 3-4 बार पीने से पेटदर्द ठीक हो जाता है।
पथरी- मूली की शाखों के 100 ग्राम रस को दिन में 3 बार पीने से पथरी के टुकड़े हो जाते हैं। मूली के पत्तों के 10 ग्राम रस में अजमोद(parsley, celery) मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पथरी गल जाती है।
सूजन-मूली के 2 ग्राम बीज, 5 ग्राम तिल के साथ दिन में 3 बार लेने से सब प्रकार की सूजन मिटती है।
दाद- मूली के बीजों को निंबू के रस में पीसकर लगाएं, लाभ होगा।

   

Wednesday, November 16, 2011

तो चले जाना...



कुछ देर ज़रा रुक जाओ,
थोड़ा सुकूं आने दो
दिल को ठंडक मिल जाए,
तो चले जाना...

आंख भर आने दो,
धड़कने बढ़ जाने दो
रूह में करार आए,
तो चले जाना...

तेरे दिल से जो निकली,
उस आह को छूने दो
हर दर्द दिल में उतर जाए,
तो चले जाना...

तेरी आंखों से जो निकली,
उस नमी को पीने दो
ग़म सारे सिमट जाए,
तो चले जाना...

सांस को सांस आए,
ये रात ज़रा धुंधलाए,
जज़बात करार पा जाए
तो चले जाना...




Friday, November 4, 2011

ये सच्चाई है..


कुछ चीजें अनायास ही सामने आ जाती हैं
जो अहसास करा जाती हैं वास्तविकता का
बताती हैं कि आज जो हम हैं कल वो नहीं होंगे
ये लड़कपन आज का, कल झुर्रियों में बदल जाएगा
मजबूरी कभी, सठियाना कभी, तो कभी बुढ़ापा कहलाएगा

आज हम उन अपनों के पास नहीं हैं 
कल हमारे पास कौन होगा ?
हम खुद भी ऐसे न सही, मजबूरी सही
अपने बच्चों को भी क्या ये 
मजबूरी ही देकर जाएंगे ?

कुछ सवाल परेशान कर देते हैं
जिनके जवाब मिलते ही नहीं
सच्चाई कड़वी होती है, निगली नहीं जाती
बुढापा भी शायद ऐसा ही होता है, 
सच्चाई की तरह कड़वा
अकेले जिया नहीं जाता !