Sunday, August 21, 2011

hare krishna !

"Hare Krishna, Hare Krishna, Krishna Krishna, Hare Hare
 Hare Rama, Hare Rama, Rama Rama, Hare Hare "



Wednesday, August 17, 2011

एक सवाल...

अन्ना का अनशन क्यों रोकना चाहती है सरकार..? ये एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है.. सवाल ये भी है कि अन्ना क्यों अनशन करना चाहते हैं..?  पर यदि सारे देश का इस सवाल से सरोकार है तो सरकार क्यों इसे रोकना चाहती है.. अब सरकार इस बात का जवाब दे..
कांग्रेस को देश में आंदोलनों का सबसे ज्यादा अनुभव है.. आखिर इसकी स्थापना हुए एक सदी से ज्यादा समय बीत चुका है.. तो फिर कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार क्यों देश को किसी भी तरह के आंदोलन से रोकने का प्रयास कर रही है.. आंदोलन यानी किसी भी मसले पर असहमत होने का अधिकार.. और उस असहमति को जताने का अधिकार.. फिर क्यों उसे सीमाओं में बांधने का प्रयास किया जा रहा है.. सिर्फ 3 दिनों के लिए अनुमति.. सिर्फ कुछ हज़ार लोगों को इसमें शामिल होने का अधिकार.. सिर्फ कुछ गाड़ियों की पार्किंग.. अब इस सरकार की मनोदशा तो साफ है.. लेकिन इसमें माद्दा कितना है.. ये तो अब आने वाला समय ही बताएगा..
अब अन्ना को रोकने का मतलब है सरकार अगले चुनाव का इंतज़ार भी नहीं करना चाहती.. ये एक ऐसा सत्य है जो शायद इस सरकार में बैठे लोग भी जानते हैं.. इनके सलाहकार या थिंक टैंक.. इनके फायनेंसर मतलब सभी लोग इस बात को बड़ी आसानी से समझ सकते हैं.. वैसे भी करप्शन के इतने आरोप और महंगाई को इस स्तर तक ले जाने के बाद सरकार का ये कदम यकीनन उसे परेशानी में डाल सकता है।
पर यदि अन्ना के आंदोलन के साथ सारा देश है तो फिर जनलोकपाल कानून के बनने में क्या परेशानी है.. यदि सभी दूसरे दल तय कर लें तो कांग्रेस क्या कोई भी इस कानून को बनने से नहीं रोक सकता.. लेकिन ऐसा नहीं है.. क्योंकि दसरे दल इस आंदोलन को ऊपरी समर्थन दे रहे हैं.. भाजपा, बसपा, सपा, कम्यूनिस्ट अब तक इस आंदोलन से सुरक्षित दूरी बनाए हुए हैं। केवल संसद में थोड़ी बहुत जुगाली.. हंगामा.. प्रधानमंत्री को जवाब देने के लिए मजबूर करना क्या इतना पर्याप्त है.. देश और अन्ना के आंदोलन को  इन दलों के एक-दो दिन के आंदोलन से कोई फायदा नहीं होने वाला है..
समय आ गया है कि भगवान सरकार को सदबुद्धि.. दूसरे दलों को इमानदारी, जनता को लड़ने की हिम्मत और पूरे देश को एक नए संघर्ष का माद्दा दे.. शायद तभी कुछ हो पाएगा..  नहीं तो जनता की याददाश्त बहुत कमज़ोर होती है.. और मुर्दा कौमें केवल इतिहास में ज़िंदा रहती हैं..  और देश को मिल जाती है कुछ महापुरूषों की मूर्तियां, कुछ चौक और कुछ जयंतियां-पुण्यतिथियां.. लेकिन अभी भी ज्यादा देर नहीं हुई है.. ज़रुरत है लड़ने की.. कुछ कर गुज़रने की.. समय एक बार फिर हमें खुद को साबित करने की चुनौती दे रहा है.. हमने आज़ादी हासिल की.. अपना संविधान बनाया.. इमरजेंसी थोपने वालों को सत्ता से उतार फेंका..  खुद को एक ताकतवर देश के रूप में स्थापित किया.. अपनी मेधा का लोहा मनवाया.. और अब हम अपना जन लोकपाल भी बनवाएंगे.... जयहिंद..।।

'' उसूलों पे जहां आंच आए, टकराना ज़रूरी है,
जो ज़िन्दा हो तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है।''

अन्ना


 तुम गिराने में लगे थे, तुमने सोचा ही नहीं,
    मैं गिरा तो मसला बन कर खड़ा हो जाउंगा।।

Monday, August 15, 2011

एक नई शुरूआत..

15 अगस्त को हमने अपनी आज़ादी की वर्षगांठ मनाई..  किसी अच्छी शुरूआत के लिए इससे अच्छा समय नहीं हो सकता.. मैने ये तय किया है कि मैं अब से प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट के लिए लाइट्स ऑफ रखूंगी.. मैं जानती हूं कि इससे कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता.. लेकिन बूंद बूंद से ही सागर भरता है.. मैं ये भी कहना चाहती हूं कि ज्यादा ज़रुरी अच्छी सोच है.. पहले अच्छा सोचें तभी कुछ अच्छा कर पाएंगे.. मैं आज से ये छोटी सी शुरूआत कर रही हूं.. आप साथ आएंगे तो हम मिलकर देश के लिए थोड़ी सी बिजली बचा पाएंगे..
जयहिंद ।।

Saturday, August 13, 2011

My brother...

                              


Again it is rakhi...again there is rain, 
again I am alone, again i am feeling the pain!

Market is decorated, sweets are dulcet,
rakhis are praised and so beautiful again!

Again I bought a bond for your wrist,
again I wrapped my emotions into it!

I remembered our childhood today,
I stashed my tears in the eyes again!

Again  I see the sky full of kites,
Again I recall the sport delight!

My brother is so far from me, 
My brother is officially engaged again!

He wanted to come, he tried his best, 
But the time ditched us again!

Meaning of rakhi to me is my brother,
if he is not here, the festival is vain!

I am embarrassed, I am sad
I am missing my brother again !
I am missing my brother again ! !

Thursday, August 11, 2011

16 अगस्त....


16 अगस्त पास आ रहा है.. ऐसा क्या खास है 16 अगस्त को.. देश तो 15 अगस्त को आज़ाद हुआ था.. तो फिर एक दिन बाद ऐसा क्या है..  16 अगस्त से अन्ना हजारे जनलोकपाल बिल को लेकर अपने संघर्ष का दूसरा चरण शुरू करने जा रहे हैं। आज अन्ना ने अपने आंदोलन के लिए जयप्रकाश पार्क का चुनाव कर लिया है..  अन्ना को ये जगह दिल्ली पुलिस ने सुझाई थी.. अन्ना के समर्थन में देशभर में लोग जुटने लगे हैं। अलग-अलग स्थानों से नुक्कड़ सभाओं की खबरें आ रही हैं.. भोपाल में गैस पीड़ितों ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया है.. लब्बोलुआब ये कि अन्ना के समर्थन में पूरा देश एक बार फिर उठ खड़ा होगा.. ये अब तकरीबन निश्चित है।
सादा जीवन उच्च विचार को आदर्श मानने वाले अन्ना ने जब 5 अप्रेल से जंतर मंतर पर अपना उपवास शुरू किया था.. तो सारा देश ही उमड़ पड़ा था.. आंदोलन के विस्तार को देखते हुए अंतत: सरकार ने अन्ना के आंदोलन से सहमति जताई थी.. सरकार का सहमत होना एक बड़ी जीत थी.. लेकिन अन्ना जानते थे कि उनकी राह आसान नहीं है.. उन्होंने इस बात के संकेत दे दिए थे कि वो अब शांत नहीं बैठने वाले हैं.. बाद में सरकार के रवैये को देखते हुए उन्होंने 16 अगस्त को अपना आंदोलन दोबारा शुरू करने की बात की थी.. 
इस उम्मीद के साथ कि इस बार अन्ना देश के लिए जनलोकपाल कानून बनवाने में सफल होंगे.. मैं भी पूरे देश के साथ 16 अगस्त की राह देख रही हूं... 

Sunday, August 7, 2011

friendship day...

Since morning
I was thinking of you.. my friends..
don't you....
I want to fight with you
want to share my hard feelings with you
want to cry on your shoulders
my friend.. 
don't you....
My friends...who were very dear to me, who were
i found near to me..
Some says friends are for life...
i found some in my life..
some left... and some apart...
some are close to my heart...
I am lucky that i have you..
but please, keep in touch.. 
and be my friend for ever..
with 
all the hard & soft feelings..
differences we were having..
all the cadbury five stars, 
pastry's, samosa's
and 
with tears
my friend.
& don't dare forget me..
happy friendship day...
my friends......
my parents..
my lovely little sisters
my students
my keshu

love & regards

parul



Friday, August 5, 2011

नम आंखें....


अपने आंचल में आज देखा 
आंसुओं की नमी थी..
मगर मैं तो रोई न थी..
तो फिर ये आंसू कैसे?
जवाब मासूम सा था,
आंसू नन्हीं आंखों के थे।
उसकी आंखें ही बोलती हैं..
वो मेरी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं..
ज़िंदगी है..
वो आज परेशान है..
मेरे आंचल में सुकून तलाश रहा है..
मुझे पता है..
उसे लगता है
मां सब कुछ ठीक कर देगी..
मां..
पर वो शायद समझ रहा है..
मेरी छलकी आंखों ने उसे जवाब दे दिया है..
उसका और मेरा दर्द एक है.
मै परेशान हूं..
क्योंकि वो परेशान है..
मेरा बेटा..मेरा सबकुछ..
मेरी आंखें भी अब नम हैं..
और वो 
मेरे आंसू पोछ रहा है..