Wednesday, December 7, 2011

अभी और भी जीना है..



उगते सूरज ने आज मुझसे कहा
चलो, कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी चलना है
अभी और भी जीना है

ये बाल अब पकने लगे, 
माथे के बल भी बढ़ने लगे
आंखों की चमक खो रही 
होंठों की हंसी को बनाए रखना है 
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

मुश्किलों का क्या है, 
आएंगी जाएंगी
अभी और लड़ना है
अभी और जीतना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

जीवन के हर मोड़ पर 
तुम्हें पत्थर कई मिलेंगे
उनको संजोना है और
नाम अपना लिखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

ड़ालियों के फूल मुरझा न जाएं
उन्हें बागीचे में सजाए रखना हैं
हर सुबह सींचना है 
हर रात देखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है

आंधियां तो आएंगी और सताएंगी
हवा ही तो हैं...हवा हो जाएंगी
बस चरागों की लौ को थामे रखना है
कुछ देर आराम कर लो
अभी और भी जीना है



8 comments:

  1. dhoop bhi hai chaon bhi
    aanso bhi hai muskaan bhi
    mushkil bhi hai aasan bhi
    har rang se bhari hui
    Zindagi isi ka naam hai...........

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  2. Parul...aap hamesha hee kamaal kartee hain....aafareen rachna aapki...!

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  3. By writing these poems, you have proved yourself more matured than your father..!! God Bless you child..!! :)

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  4. no child in this world can achieve the maturity level of a father...this is a fact !! thanks for you very first comment on my blog. i am blessed !!

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  5. संवेदनपूर्ण पंक्तियाँ..

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  6. आंधियां तो आएंगी और सताएंगी
    हवा ही तो हैं...हवा हो जाएंगी

    बहुत सुंदर ...

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