Friday, November 4, 2011

ये सच्चाई है..


कुछ चीजें अनायास ही सामने आ जाती हैं
जो अहसास करा जाती हैं वास्तविकता का
बताती हैं कि आज जो हम हैं कल वो नहीं होंगे
ये लड़कपन आज का, कल झुर्रियों में बदल जाएगा
मजबूरी कभी, सठियाना कभी, तो कभी बुढ़ापा कहलाएगा

आज हम उन अपनों के पास नहीं हैं 
कल हमारे पास कौन होगा ?
हम खुद भी ऐसे न सही, मजबूरी सही
अपने बच्चों को भी क्या ये 
मजबूरी ही देकर जाएंगे ?

कुछ सवाल परेशान कर देते हैं
जिनके जवाब मिलते ही नहीं
सच्चाई कड़वी होती है, निगली नहीं जाती
बुढापा भी शायद ऐसा ही होता है, 
सच्चाई की तरह कड़वा
अकेले जिया नहीं जाता !

5 comments:

  1. कल 25/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

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  3. खुबसूरत अभिवयक्ति......

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आपके कमेंट्स बेहद अनमोल हैं मेरे लिए...मेरा हौसला बढ़ाते हैं...मुझे प्रेरणा देते हैं..मुझे जोड़े रखते आप लोगों से...तो कमेंट ज़रूर कीजिए।